Family Tragedy: किसकी सुलह की उम्मीद में था 19 साल का कुणाल, फिर पहाड़ी पर खत्म हुआ पूरा परिवार

छत्रपति संभाजीनगर में तीन सदस्यों की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया कि 19 वर्षीय कुणाल माता-पिता के पुराने विवाद खत्म कर परिवार को फिर साथ देखना चाहता था।

Family Tragedy: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर की खुवाडिया पहाड़ी पर हुई चंदगुडे परिवार की दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर दिया है। 19 वर्षीय कुणाल, उसके पिता मुरलीधर और मां संगीता की मौत के बाद मामले की जांच जारी है। अब सामने आई जानकारी से पता चलता है कि कुणाल अपने माता-पिता के बीच लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को खत्म करना चाहता था। परिवार में प्रॉपर्टी को लेकर तनाव और पति-पत्नी के बीच विवाद का असर बेटे पर भी पड़ रहा था। कुणाल चाहता था कि उसके माता-पिता फिर से पहले की तरह साथ रहें और परिवार में शांति लौट आए।

डॉक्टर बनने का सपना

रिश्तेदारों के मुताबिक कुणाल पढ़ाई में काफी अच्छा था। उसने इसी साल CBSE की 10वीं परीक्षा में 82 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और आगे MBBS की पढ़ाई करने का सपना देख रहा था। परिवार के लोगों का कहना है कि वह अपने माता-पिता को लेकर काफी चिंतित रहता था। उसकी इच्छा थी कि घर के पुराने विवाद खत्म हों और परिवार दोबारा एकजुट हो। लेकिन हालात उसके मुताबिक नहीं बदल सके। जिस युवा के सामने पढ़ाई और करियर का लंबा सफर था, उसकी जिंदगी इतनी कम उम्र में ही खत्म हो गई।

22 साल पुरानी शादी

मुरलीधर की बहन शोभा राजेंद्र मस्के ने बताया कि मुरलीधर और संगीता ने करीब 22 साल पहले लव मैरिज की थी। उनके मुताबिक, मुरलीधर के माता-पिता इस शादी के पक्ष में नहीं थे और शादी में भी शामिल नहीं हुए थे। शादी के बाद परिवार के रिश्तों में दूरी बढ़ती गई। शोभा ने पति-पत्नी के बीच कई वर्षों से चले आ रहे मतभेदों का भी जिक्र किया। दूसरी ओर, संगीता के मायके वालों ने भी प्रॉपर्टी और पारिवारिक विवादों को लेकर तनाव की बात कही है। हालांकि इन सभी पहलुओं की पुलिस जांच कर रही है।

बाहर से शांत था परिवार

जिस मकान में परिवार किराए पर रहता था, वहां के केयरटेकर और पड़ोसियों के मुताबिक चंदगुडे परिवार बाहर से बेहद सामान्य और शांत नजर आता था। मुरलीधर पिछले करीब 10 वर्षों से ड्राइवर का काम कर रहे थे और उनके व्यवहार को लेकर कभी कोई बड़ी शिकायत सामने नहीं आई। चौधरी ट्रांसपोर्ट के मैनेजर पवन ओतांबे ने भी बताया कि मुरलीधर ने लंबे समय तक उनके यहां ड्राइवर के तौर पर काम किया और वह अनुशासित व्यक्ति थे। पड़ोसियों के अनुसार कुणाल पढ़ाई में होनहार था और मेडिकल की पढ़ाई करने की बात करता था।

पहाड़ी पर पहुंचा कुणाल

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक कुणाल सुबह करीब 8 बजे घर से निकला था। बताया गया कि उसे अपनी क्लास के लिए जाना था, लेकिन सुबह 9:10 बजे तक वह संस्थान नहीं पहुंचा। इसके बाद संस्थान ने उसकी मां से संपर्क किया। करीब 10 बजे से 10:30 बजे के बीच उसकी लोकेशन खुवाडिया पहाड़ी पर मिली। स्थानीय लोगों ने करीब 10:45 बजे पुलिस को जानकारी दी। लगभग 11:30 बजे फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। उस समय कुणाल पहाड़ी की चोटी पर था और लगातार अपनी जगह बदल रहा था। बचावकर्मियों ने उसे समझाकर वापस लाने की कोशिश की और नीचे सुरक्षा के लिए नेट भी लगाया।

कुछ मिनटों में सब खत्म

इसी दौरान मुरलीधर अपने बेटे तक पहुंचे और उसका हाथ पकड़कर उसे सुरक्षित करने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, इसी कोशिश में दोनों का संतुलन बिगड़ गया और वे नीचे गिर गए। इसके कुछ देर बाद संगीता ने भी पहाड़ी से छलांग लगा दी। घटना ने पूरे परिवार को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। हादसे के बाद परिवार का पालतू कुत्ता ‘शेरू’ दो दिन तक बंद घर के अंदर अपने मालिकों का इंतजार करता रहा। पड़ोसियों ने उसे खाना और पानी दिया। बाद में एक एनिमल वेलफेयर ग्रुप ने शेरू को रेस्क्यू कर म्युनिसिपल शेल्टर पहुंचाया। मामले की जांच में पुलिस अब परिवार के विवाद, घटनाक्रम और मौत से जुड़े सभी पहलुओं को जोड़ने में जुटी है।

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