Bankipur Politics: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव जीतने के महज 24 घंटे के भीतर ही नव-निर्वाचित विधायक प्रशांत किशोर को लेकर भाजपा ने नया राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। बिहार भाजपा आईटी सेल के संयोजक विकास मेहता ने इलाके में फैले कूड़े-कचरे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सीधे प्रशांत किशोर से सवाल पूछा कि आखिर यह कचरा कब साफ होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दो दिनों के भीतर सफाई नहीं हुई तो कूड़ा जन सुराज के कार्यालय के बाहर डाल दिया जाएगा। इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
भाजपा का हमला
विकास मेहता ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि जनता को अब अपने विधायक से जवाब चाहिए। उनका कहना था कि चुनाव के दौरान जन सुराज के नेताओं ने कई बार कहा था कि विधायक जनता की समस्याओं के लिए जिम्मेदार होता है। ऐसे में अब बांकीपुर की सफाई को लेकर भी प्रशांत किशोर को जवाब देना चाहिए। उन्होंने दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि सफाई नहीं हुई तो विरोध के तौर पर कूड़ा उनके कार्यालय के बाहर डाल दिया जाएगा।
जिम्मेदारी किसकी?
इस पूरे विवाद के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि शहर की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर निगम की होती है। पटना नगर निगम की मेयर भाजपा की सीता साहू हैं और कूड़ा उठाने का काम निगम के अधीन आता है। ऐसे में विपक्ष भाजपा पर ही सवाल उठा रहा है कि जब नगर निगम भाजपा के नियंत्रण में है तो सफाई व्यवस्था को लेकर नव-निर्वाचित विधायक को निशाना क्यों बनाया जा रहा है। यही वजह है कि यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
ऐतिहासिक जीत के बाद बढ़ी सियासत
बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा को करीब 19 हजार वोटों से हराकर बड़ा उलटफेर किया। यह सीट पिछले तीन दशकों से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती थी और पूर्व विधायक नितिन नवीन लगातार यहां जीतते रहे थे। प्रशांत किशोर की जीत को जन सुराज की पहली विधानसभा सफलता माना जा रहा है। इसी कारण परिणाम के तुरंत बाद राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल कूड़े को लेकर शुरू हुआ यह विवाद राजनीतिक रंग ले चुका है। भाजपा लगातार प्रशांत किशोर को उनके चुनावी वादों की याद दिला रही है, जबकि जन सुराज समर्थक इसे केवल राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या स्थानीय राजनीति में नया मुद्दा बन जाता है।









