Smriti Irani ने पीएम मोदी को लेकर कही भावुक बात, इंटरव्यू में PM Modi के कामो की सराहना

स्मृति ईरानी ने एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में पीएम मोदी के कामकाज और नेतृत्व की तारीफ की। उन्होंने भावुक होकर पीएम मोदी को अपने पिता की उम्र का बताया और कहा कि उनके खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी या व्यवहार को लेकर वह भावनात्मक रूप से प्रतिक्रिया देती हैं।

Smriti Irani Interview: पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा महासचिव स्मृति ईरानी ने हालिया पॉडकास्ट इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज को लेकर अपनी राय रखी। बातचीत के दौरान वह पीएम मोदी के निजी संघर्ष और काम के प्रति उनके समर्पण का जिक्र करते हुए भावुक भी हो गईं।

स्मृति ईरानी ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने पिता की उम्र का बताया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की मां के निधन के बाद भी उन्होंने सार्वजनिक जिम्मेदारियों को निभाया। इसी संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रति अपने व्यक्तिगत सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव की बात कही।

बांध परियोजना का उदाहरण दिया

स्मृति ईरानी ने प्रधानमंत्री मोदी के कामकाज को समझाने के लिए एक बांध परियोजना का उदाहरण भी दिया। उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना की कल्पना 1946 में सरदार पटेल के समय हुई थी और 1961 में जवाहरलाल नेहरू ने इसका शिलान्यास किया था। उनके मुताबिक, परियोजना लंबे समय तक पूरी नहीं हो सकी और बाद में कानूनी अड़चनों के कारण भी काम प्रभावित हुआ।

ईरानी के अनुसार, नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्होंने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र को पत्र लिखे। उन्होंने सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों और सुरक्षा बलों से जुड़े पानी के मुद्दों का भी उल्लेख किया। स्मृति ईरानी ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद परियोजना की ऊंचाई बढ़ाने की अनुमति मिली और इससे बड़ी संख्या में लोगों को पानी उपलब्ध हुआ।

संसद में बहस को लेकर भी बोलीं

स्मृति ईरानी ने संसद की कार्यवाही को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पिछले संसद सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार की ओर से बहस के लिए तैयार होने की बात कही थी। उनके मुताबिक, संसद में चर्चा तभी संभव है जब सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चले।

दो साल बाद भाजपा में बड़ी जिम्मेदारी

लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद करीब दो वर्षों तक स्मृति ईरानी को कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं मिली थी। हाल में भाजपा ने उन्हें महासचिव नियुक्त किया है।

अपने राजनीतिक सफर पर उन्होंने कहा कि उनके लिए पद ही पहचान नहीं है। उन्होंने 2003 में भाजपा युवा मोर्चा से संगठनात्मक भूमिका शुरू करने का जिक्र किया और बताया कि उस समय देवेंद्र फडणवीस भी संगठन में उनके साथ काम कर रहे थे।

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