BJP Win in Bhabanipur: इस बार बंगाल विधानसभा चुनाव में सिर्फ स्थानीय मुद्दे ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों के बड़े रणनीतिकार भी चर्चा में रहे। चुनावी मैदान में रणनीति और जमीनी मेहनत का असर साफ देखने को मिला। भवानीपुर सीट पर भाजपा उम्मीदवार Suvendu Adhikari ने शानदार जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। उन्होंने भवानीपुर के साथ नंदीग्राम सीट भी जीती। यह जीत उनके लिए काफी अहम मानी जा रही है।
राठौड़ को मिली खास जिम्मेदारी
इस जीत के पीछे राजस्थान के वरिष्ठ भाजपा नेता Rajendra Rathore की रणनीति का बड़ा योगदान बताया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें इस हाई-प्रोफाइल सीट पर खास जिम्मेदारी दी थी, जिसे उन्होंने पूरी मेहनत से निभाया।
मारवाड़ी समाज पर फोकस
भवानीपुर सीट की खास बात यह है कि यहां मारवाड़ी और हिंदी भाषी लोगों की अच्छी-खासी संख्या है। भाजपा ने इसी समीकरण को ध्यान में रखते हुए राठौड़ को यहां तैनात किया। उन्होंने करीब दो महीने तक क्षेत्र में रहकर लोगों से सीधा संपर्क बनाया।
घर-घर पहुंचकर किया काम
राठौड़ ने बड़े-बड़े मंचों के बजाय छोटे कार्यक्रमों पर ज्यादा ध्यान दिया। उन्होंने नुक्कड़ सभाएं कीं, लोगों के घरों तक पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनीं। इस तरीके ने मतदाताओं के बीच भरोसा बढ़ाने में मदद की।मारवाड़ी समाज के साथ राठौड़ का जुड़ाव और उनकी साख ने भाजपा को फायदा पहुंचाया। लोगों को लगा कि पार्टी उनकी बात समझ रही है। यही वजह रही कि इस वर्ग का झुकाव भाजपा की तरफ बढ़ा।
जीत में निभाई अहम भूमिका
सुवेंदु अधिकारी के लिए यह चुनाव काफी अहम था। ऐसे में राठौड़ की बनाई रणनीति और मजबूत नेटवर्क उनके लिए बहुत काम आई। मारवाड़ी वोटरों को एकजुट करने से मुकाबला भाजपा के पक्ष में जाता दिखा।
खुद अधिकारी ने माना योगदान
चुनाव जीतने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने भी सार्वजनिक तौर पर राठौड़ के काम की सराहना की। उन्होंने कहा कि मारवाड़ी समाज को जोड़ने में राठौड़ की भूमिका बहुत अहम रही।
राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी पहचान
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि राजेंद्र राठौड़ अब सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने यह दिखा दिया कि वे किसी भी राज्य में जाकर मजबूत रणनीति बना सकते हैं और पार्टी को फायदा पहुंचा सकते हैं।

