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Debt Market : भारतीय डेट मार्केट से विदेशी निवेशकों की तेज निकासी, क्या यील्ड गैप घटने और रुपये की कमजोरी से बढ़ी चिंता

अप्रैल 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय डेट मार्केट से भारी निकासी की है। यील्ड गैप घटने, रुपये की कमजोरी और महंगे क्रूड के कारण निवेशकों का भरोसा कम हुआ है।

Kirtika Tyagi by Kirtika Tyagi
April 17, 2026
in व्यापार
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अप्रैल 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने भारतीय डेट मार्केट से बड़ी मात्रा में पैसा निकाल लिया है। अब तक करीब 1.23 अरब डॉलर से ज्यादा की बिकवाली हो चुकी है। अगर यही रफ्तार जारी रही, तो यह अप्रैल 2025 के बाद सबसे बड़ी मासिक निकासी बन सकती है। तुलना करें तो मार्च महीने में यह आंकड़ा करीब 977 मिलियन डॉलर था, जिससे साफ है कि इस बार आउटफ्लो और तेज हुआ है।

यील्ड गैप हुआ कम

इस बिकवाली की सबसे बड़ी वजह भारत और अमेरिका के बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर कम होना है। पहले यह अंतर करीब 300 से 400 बेसिस प्वाइंट तक था, लेकिन अब घटकर 200 से 250 बेसिस प्वाइंट रह गया है। इसका मतलब यह है कि पहले भारतीय बॉन्ड में ज्यादा रिटर्न मिलता था, लेकिन अब यह फायदा कम हो गया है। इसी कारण विदेशी निवेशकों का रुझान कम हो रहा है।

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रुपये की कमजोरी का असर

विदेशी निवेशक सिर्फ ब्याज दर नहीं देखते, बल्कि करेंसी का भी ध्यान रखते हैं। इस साल रुपये में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। साथ ही वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता भी बनी हुई है। अगर रुपया कमजोर होता है, तो निवेशकों को मिलने वाला असली रिटर्न घट जाता है। यही वजह है कि वे भारतीय बाजार से पैसा निकालना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं।

महंगा क्रूड बना चिंता

क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार 80 से 90 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं। भारत जैसे देश, जो ज्यादा तेल आयात करता है, उसके लिए यह चिंता की बात है। महंगे तेल से चालू खाता घाटा यानी CAD बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव पड़ता है। इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा और कम होता है।

हेजिंग की बढ़ी लागत

जब विदेशी निवेशक करेंसी रिस्क से बचने के लिए हेजिंग करते हैं, तो उसकी लागत भी काफी बढ़ गई है। इस लागत को जोड़ने के बाद भारत और अमेरिका के बॉन्ड के बीच जो रिटर्न का अंतर बचता था, वह लगभग खत्म हो जाता है। ऐसे में भारतीय डेट में निवेश का आकर्षण कम हो जाता है।

घरेलू कारण भी जिम्मेदार

देश के अंदर के हालात भी ज्यादा मददगार नहीं हैं। आरबीआई पहले ही इशारा कर चुका है कि महंगाई बढ़ने का खतरा अभी बना हुआ है, खासकर महंगे तेल और मौसम की वजह से। इसके अलावा सरकार और राज्यों की तरफ से ज्यादा बॉन्ड जारी किए जा रहे हैं, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई है और यील्ड पर दबाव बना हुआ है।

वापसी कब होगी

विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की वापसी दो चीजों पर निर्भर करेगी। पहला, भारत और अमेरिका के यील्ड के बीच अंतर फिर से बढ़े। दूसरा, रुपये में स्थिरता आए। फिलहाल अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम है और भारत में भी दरें स्थिर रह सकती हैं, इसलिए जल्द बड़े बदलाव की उम्मीद कम नजर आ रही है।

Tags: FII OutflowIndian Debt Market
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Kirtika Tyagi

Kirtika Tyagi

Kirtika Tyagi is a journalist. she is working on sub-editor post and she is expert in International, National, Health, Crime, Lifestyle, Astro beat. 

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