Bharat Bhushan Tiwari Encounter Case: भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की मांग करने वालों को फिलहाल राहत नहीं मिली है। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले से जुड़ी जनहित याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद अब याचिकाकर्ता को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ना होगा। मामले को लेकर पहले से ही काफी चर्चा चल रही है और अब सुप्रीम कोर्ट के इस कदम के बाद लोगों की नजर अगली सुनवाई पर टिकी हुई है।
किसने दायर की थी याचिका?
यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी की ओर से 21 जून 2026 को दाखिल की गई थी। याचिका में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह मुठभेड़ संदिग्ध परिस्थितियों में हुई और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
सीबीआई जांच की मांग
याचिका में इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच जरूरी है। इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया है कि घटना में शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच होनी चाहिए और यदि जरूरत पड़े तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाए।
पुलिसकर्मियों पर एफआईआर की मांग
याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि इस मामले में शामिल पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया जाए। साथ ही उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए। यह समिति सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में काम करे, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके।
अदालत ने क्या कहा?
सोमवार को जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता को आगे की प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी है। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष प्रस्तुत करें। इसके बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब यह मामला रजिस्ट्रार के सामने रखा जाएगा। इसके बाद तय प्रक्रिया के अनुसार सुनवाई की तारीख और आगे की कानूनी कार्रवाई तय हो सकती है। फिलहाल अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। इसलिए सभी पक्षों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में इस याचिका पर क्या फैसला लिया जाता है।









