Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट का आवारा कुत्तों पर बड़ा वर्डिक्ट, अदालत ने किसकी सुरक्षा को बताया सबसे जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों पर चिंता जताते हुए राज्यों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अदालत ने लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए डार्विन के “सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट” सिद्धांत का भी जिक्र किया।

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Stray Dogs:Supreme Court of India ने आवारा कुत्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। अदालत ने साफ कहा कि लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट का मानना है कि सार्वजनिक जगहों पर बढ़ते आवारा कुत्तों के मामलों को रोकने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं।

अदालत ने कहा कि Animal Birth Control यानी ABC नियम आबादी को नियंत्रित करने में पूरी तरह सफल नहीं रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर हालात ऐसे ही चलते रहे, तो आम लोगों के लिए सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षित रहना मुश्किल हो जाएगा।

डार्विन के सिद्धांत का दिया उदाहरण

सुनवाई के दौरान अदालत ने वैज्ञानिक Charles Darwin के विकासवाद के सिद्धांत का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि अगर सार्वजनिक जगहों पर डर और खतरे का माहौल बना रहेगा, तो स्थिति “सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट” जैसी हो जाएगी।

इसका मतलब है कि वही व्यक्ति सुरक्षित रह पाएगा, जो खुद को बचाने में सबसे ज्यादा सक्षम होगा। अदालत ने कहा कि यह स्थिति किसी भी संवैधानिक लोकतंत्र के लिए सही नहीं है, क्योंकि देश कानून के आधार पर चलता है, डर और ताकत के आधार पर नहीं।

क्या है डार्विन का विकासवाद सिद्धांत

चार्ल्स डार्विन का विकासवाद सिद्धांत कहता है कि पृथ्वी पर मौजूद सभी जीव समय के साथ प्राकृतिक प्रक्रिया से विकसित हुए हैं। प्रकृति उन्हीं जीवों को आगे बढ़ने का मौका देती है, जो हालात के अनुसार खुद को बेहतर तरीके से ढाल पाते हैं।

इस सिद्धांत में यह भी बताया गया है कि सीमित संसाधनों के कारण जीवों के बीच संघर्ष होता है और जो ज्यादा मजबूत या अनुकूल होता है, वही जीवित रहता है। अदालत ने इसी सिद्धांत का उदाहरण देकर लोगों की सुरक्षा की चिंता जताई।

2025 वाला आदेश रहेगा लागू

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने वाला 2025 का आदेश जारी रहेगा। जस्टिस Vikram Nath, जस्टिस Sandeep Mehta और जस्टिस N. V. Anjaria की बेंच ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड की सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।

अदालत ने कहा कि आवारा कुत्तों के हमलों में कई बच्चे और महिलाएं गंभीर रूप से घायल हुए हैं। ऐसे मामलों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

राज्यों को दिए सख्त निर्देश

कोर्ट ने राज्यों से कहा कि वे Animal Birth Control नियमों का सही तरीके से पालन करें। अदालत ने यह भी कहा कि रेबीज जैसी बीमारी के कारण कई लोगों की मौत हो चुकी है और नागरिकों की सुरक्षा करना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर उसके पुराने आदेशों का पालन नहीं किया गया, तो अवमानना की कार्रवाई भी हो सकती है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं पर आंखें बंद नहीं की जा सकतीं।

डॉग लवर्स को लगा झटका

अदालत के इस फैसले से डॉग लवर्स और पशु अधिकार संगठनों को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी याचिकाएं खारिज करते हुए पशु कल्याण बोर्ड की नई गाइडलाइन को सही माना।

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि देशभर में बढ़ रहे डॉग बाइट मामलों को गंभीरता से लेना जरूरी है। अदालत ने एक बार फिर कहा कि लोगों की सुरक्षा सबसे पहले होनी चाहिए।

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