लखनऊ ऑनलाइन डेस्क। उत्तर प्रदेश के बहराइच में एकबार फिर खूंखार भेड़िए ने दस्तक दे दी है। आदमखोर शिकारी फिर से पंजे के जरिए बच्चों का शिकार कर रहा है। बीते रात भेड़िया 8 घंटे के अंदर 2 बच्चों को खा गए। परिवारवाले और ग्रामीणों ने भेड़ियों को देखा और शोर मचाया। लोग भेड़ियों के पीछे भागे, लेकिन वह दोनों बच्चों को जंगल में ले जाने में कामयाब रहे। एक मासूम को भेड़िए खा गए, जबकि दूसरे के शरीर को नोच रहे थे। तभी ग्रामीणों ने भेड़िए के चंगुल से मासूम को छुड़ाया, लेकिन अस्पताल ले जाते वक्त उसकी मौत हो गई।
बहराइच के कैसरगंज थानाक्षेत्र स्थित मल्लहनपुरवा गांव में शुक्रवार शाम साढ़े चार बजे 5 साल के मासूम को 2 आदमखोर भेड़िए घर से उठा ले गए। एक ने मासूम की गर्दन दबोची, दूसरे ने पैर। लोगों ने देखा तो लाठी-डंडे लेकर पीछे भागे। 500 मीटर दूर खेत में मासूम खून से लथपथ मिला। दोनों हथेलियां और पंजे भेड़िये खा चुके थे। ग्रामीणों ने भेड़ियों के चंगुल से मासूम को छुड़ाया और अस्पताल ले जाने लगे। लखनऊ से कूछ दूरी पर मासूम ने रास्ते में दम तोड़ दिया।
मृतक के पिता रोशन कुमार खेती किसानी करते हैं। उन्होंने बताया कि मेरो पांच साल का बेटा स्टार घर के ठीक सामने खेल रहा था। परिवार की महिलाएं और पड़ोसी भी वहीं मौजूद थे। तभी अचानक खेत की तरफ से आए दो भेड़ियों ने बच्चे पर हमला कर दिया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, एक भेड़िए बच्चे को जबड़े में दबोचकर गन्ने के खेत की ओर भाग गया। परिजन और ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर भेड़ियों का पीछा किया। लेकिन बच्चे को भेड़िए से नहीं बचा पाए। भेड़िए बच्चों को जंगल में ले गए।
ग्रामीण राजेंद्र सिंह ने बताया दो भेड़िए आए। बच्चा घर के सामने ही खेल रहा था। हम लोग दौड़े, लेकिन तब तक भेड़िया उसे 500 मीटर दूर गन्ने के खेत में खींच ले गया। वहां पहुंचकर देखा तो उसकी दोनों हथेलियां गायब थीं। बच्चा बेहोशी की हालत में खून से लथपथ था। पड़ोसी राजेंद्र ने बताया मेरी आंखों के सामने दो भेड़ियों ने बच्चे पर हमला किया था। एक ने उसकी गर्दन पकड़ी थी और दूसरे ने हथेली। मैंने शोर मचाया तो दोनों बच्चे को लेकर खेत की ओर भागे। मैं और बाकी लोग भी लाठी-डंडे लेकर पीछे भागे। हमने शोर मचाया तो भेड़िए गन्ने के खेत में बच्चे को छोड़कर भाग गए।
दूसरी घटना खोरिया सफीक गांव में हुई। यहां गिलौला निवासी रामचंद्र की पत्नी रमादेवी 4 दिन पहले मायके आई थीं। शुक्रवार रात रमादेवी अपने तीनों बच्चों के साथ घर में सो रही थीं। उन्होंने बताया मेरी 10 महीने की छोटी बेटी सुनीता गोद से लिपटकर सो रही थी, जबकि बड़ी बेटी और बेटा पास एक दरी पर सो रहे थे। रात डेढ़ बजे बच्ची की चीख सुनकर आंख खुली, तो देखा भेड़िया बच्ची को लेकर भाग रहा था। शोर मचाया तो ग्रामीण जुट गए। लाठी-डंडे लेकर खेत की ओर भागे। करीब ढाई घंटे बाद रात 3 बजे घर से 800 मीटर की दूरी पर गन्ने के खेत में पहुंचे तो भेड़िए को बच्ची को नोंचते हुए देखा।
ग्रामीणों को देखकर भेड़िया जंगल में भाग गया। बच्ची की तब तक मौत हो चुकी थी। पड़ोसी ने बताया रात में भतीजी रमादेवी का शोर सुनकर पहुंचा था। हम लोग लाठी-डंडे और टॉर्च लेकर खेत की ओर भागे। 800 मीटर की दूरी पर मैंने भेड़िए को अपनी आंखों से बच्ची के शव को नोंचते हुए देखा। हम लोगों को देखकर भेड़िया भाग गया, लेकिन तब तक बच्ची की मौत हो चुकी थी। ग्रामीणों की सूचना पर देहात कोतवाली पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वन विभाग को मौके पर जानवर के पगचिह्न दिखे। फिलहाल पूरे इलाके में वन विभाग की टीम पुलिस के साथ डेरा जमाए हुए हैं।
घटना पर रेंजर नायक का कहना है कि जानवर के पगचिह्न मिले हैं, जो भेड़िए नहीं, किसी अन्य जानवर के दिख रहे हैं। किस जानवर ने हमला किया, इसकी जांच की जा रही है। क्षेत्र में पेट्रोलिंग बढ़ाने और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रभागीय वनाधिकारी राम सिंह यादव ने बताया जंगली जानवर के हमले की सूचना मिलते ही टीम भेज दी गई। आसपास के जंगलों और खेतों की ड्रोन से निगरानी कराई जा रही है। तीन पिंजरे लगाए गए हैं। कॉम्बिंग तेज की गई है। उन्होंने ग्रामीणों से सतर्क रहने और छोटे बच्चों को अकेले बाहर न छोड़ने की अपील की है।
3 महीने में भेड़ियों के झुंड ने 9 बच्चों समेत 10 लोगों को मार डाला है। 38 से ज्यादा घायल हैं। खुद सीएम योगी भी बहराइच गए। उन्होंने भेड़ियों को मारने के आदेश दिए। अब तक 4 भेड़ियों का एनकाउंटर हो चुका है। इसके बावजूद खूंखार भेड़ियों के आगे पूरा सिस्टम लाचार दिख रहा है। 10 दिन पहले 4 किलोमीटर दूर गोडहिया नंबर-2 में 4 साल की बच्ची को उठा ले गया था। हालांकि, अगले दिन ही वन विभाग ने भेड़िए का एनकाउंटर कर दिया। लेकिन, बच्ची का आज तक पता नहीं चल सका। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले 2 महीने से लगातार भेड़ियों के हमले हो रहे हैं। 2 महीने में करीब 5 बच्चे शिकार बन चुके हैं। लोग अब बच्चों को घर से बाहर भेजने में डर रहे हैं। ग्रामीण देर शाम होते ही लाठी-डंडे लेकर पहरा दे रहे हैं।









