Sewer Negligence in ajnara homes: ग्रेटर नोएडा की अजनारा होम्स सोसायटी में सीवर और कचरा निस्तारण को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां बिना शोधित किए सीवर का पानी सीधे नाले में बहाया जा रहा था। इसके अलावा कूड़ा निस्तारण की सही व्यवस्था न होने पर सोसायटी पर चार लाख रुपये की पेनाल्टी भी लगाई गई है। सोसायटी की देखरेख कर रही एजेंसी के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए पुलिस को पत्र भी भेजा गया है।
बेसमेंट में भरा एसटीपी का गंदा पानी
रविवार को सोसायटी के बेसमेंट में एसटीपी का गंदा पानी भर गया था। बेसमेंट में ही वाहनों की पार्किंग है। बताया गया कि एसटीपी लंबे समय से बंद पड़ा था। अचानक एक पाइप फटने से एम, एल और जे टावरों के बेसमेंट में पानी तेजी से भरने लगा। हालात ऐसे हो गए कि करीब चार फुट तक पानी जमा हो गया। इन तीनों टावरों में 400 से ज्यादा फ्लैट हैं और लगभग दो हजार लोग रहते हैं। पानी भरने के साथ ही पूरे इलाके में तेज बदबू फैल गई, जिससे लोगों को भारी परेशानी हुई।
शिकायत के बाद पहुंची अथॉरिटी की टीम
लोगों की शिकायत पर ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की टीम मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। जांच के बाद अथॉरिटी ने सोसायटी के बिल्डर पर 50 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया। साथ ही कूड़ा निस्तारण न करने पर अलग से चार लाख रुपये की पेनाल्टी भी लगाई गई। अधिकारियों ने बताया कि पहले भी सोसायटी को नोटिस जारी किया गया था और पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था, लेकिन इसके बावजूद एसटीपी चालू नहीं किया गया।
रोजाना नाले में बह रहा सीवर
अधिकारियों के अनुसार सोसायटी से रोजाना करीब 1.15 एमएलडी सीवर निकलता है, जिसे बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे नाले में छोड़ दिया जा रहा है। यह पर्यावरण और आसपास के इलाकों के लिए गंभीर खतरा है। जांच में यह भी पाया गया कि परिसर में भूजल का दोहन किया जा रहा है और पीने के पानी का इस्तेमाल सफाई व उद्यान कार्यों में किया जा रहा है।
चेतावनी और आगे की कार्रवाई
सीवर विभाग के सीनियर मैनेजर सन्नी यादव ने बताया कि सोसायटी प्रबंधन को साफ चेतावनी दी गई है। अगर जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गईं तो और सख्त कार्रवाई की जाएगी। अथॉरिटी का कहना है कि नियमों की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
25 सोसायटियों पर पहले ही हो चुकी है कार्रवाई
अथॉरिटी के उच्च अधिकारियों को शिकायतें मिली थीं कि शहर की कई सोसायटियों में एसटीपी बंद हैं और गंदा पानी बिना शोधित किए नालों में छोड़ा जा रहा है। इसके बाद सीवर विभाग ने 220 बिल्डर सोसायटियों को नोटिस भेजकर एसटीपी की स्थिति की जानकारी मांगी। इनमें से सिर्फ 35 सोसायटियों ने जवाब दिया। जांच में इन 35 में से कई की रिपोर्ट गलत पाई गई और एसटीपी बंद मिले। अब तक 25 सोसायटियों पर कार्रवाई की जा चुकी है।









