Health Tips: स्वस्थ जीवनशैली के लिए ड्राई फ्रूट्स या मेवे हमारे आहार का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुके हैं। प्रोटीन, स्वस्थ वसा और फाइबर से भरपूर ये छोटे मेवे ऊर्जा का पावरहाउस माने जाते हैं। लेकिन जब बात इनके सेवन की आती है, तो एक बड़ी बहस छिड़ जाती है: क्या इन्हें सीधे पेड़ से उतरे हुए ‘कच्चे’ रूप में खाना चाहिए या फिर ‘भूनकर’ (Roasted) इनका स्वाद बढ़ाना चाहिए? विज्ञान और पोषण की दृष्टि से इसका जवाब आपके स्वास्थ्य लक्ष्यों पर निर्भर करता है।
कच्चे मेवे
कच्चे मेवे अपने प्राकृतिक स्वरूप में होते हैं, जिसका अर्थ है कि उनमें मौजूद संवेदनशील पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। विटामिन-ई और एंटीऑक्सीडेंट जैसे तत्व गर्मी के संपर्क में आने पर नष्ट हो सकते हैं, इसलिए कच्चे मेवे इनका बेहतर स्रोत होते हैं। इनमें कोई अतिरिक्त तेल या नमक नहीं होता, जो इन्हें हृदय रोगियों और उच्च रक्तचाप (BP) वाले मरीजों के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प बनाता है। हालांकि, कुछ मेवों में ‘फाइटेट्स’ होते हैं जो शरीर को खनिज सोखने में बाधा डाल सकते हैं, इसलिए इन्हें भिगोकर खाना सबसे उत्तम माना जाता है।
भुने हुए मेवे स्वाद
मेवों को भूनने से उनका स्वाद बढ़ जाता है और वे अधिक कुरकुरे हो जाते हैं। भूनने की प्रक्रिया मेवों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया (जैसे साल्मोनेला) को खत्म कर देती है, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। साथ ही, कुछ लोगों को कच्चे मेवे पचाने में भारी लगते हैं, उनके लिए हल्के भुने हुए मेवे पाचन के लिहाज से बेहतर होते हैं। लेकिन ध्यान रहे, अत्यधिक तापमान पर भूनने से मेवों में मौजूद ‘गुड फैट्स’ ऑक्सीडाइज हो सकते हैं, जो शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
बाजार के रोस्टेड मेवों से सावधान
अगर आप घर पर सूखे मेवे भून रहे हैं, तो यह सुरक्षित है। लेकिन बाजार में मिलने वाले पैकेट बंद रोस्टेड मेवों में अक्सर पाम ऑयल, अतिरिक्त नमक (Sodium) और प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है। यह वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों या ब्लड शुगर और बीपी के मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
निष्कर्ष: यदि आप अधिकतम पोषण चाहते हैं, तो कच्चे मेवों को रात भर भिगोकर खाएं। यदि आपको स्वाद और बेहतर पाचन चाहिए, तो घर पर बिना तेल के हल्की आंच पर भूनकर खाएं। किसी भी स्थिति में, प्रतिदिन एक मुट्ठी से अधिक मेवों का सेवन न करें।








