Akhilesh yadav daughter case update: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। कुछ पोस्ट में कहा गया कि वह लंदन की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही हैं, जबकि कुछ में करोड़ों रुपये की चोरी और विदेश भागने जैसी बातें लिखी गईं।
इन दावों ने सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी। हालांकि अब मामला केवल अफवाहों तक सीमित नहीं है। कानपुर और प्रतापगढ़ में शिकायत दर्ज होने के बाद यह विवाद कानूनी जांच के दायरे में आ गया है।
सहपाठी ने सामने रखी अपनी बात
विवाद के बीच खुद को अदिति यादव का दोस्त और सहपाठी बताने वाले आदर्श यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने दावा किया कि वायरल की जा रही कहानी पूरी तरह गलत है।
आदर्श यादव के अनुसार, अदिति यादव पिछले एक साल से भारत में ही हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी में कानून की पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने कहा कि लंदन में पढ़ाई करने की बात वास्तविकता से मेल नहीं खाती।
आदर्श ने यह भी बताया कि इन दिनों विश्वविद्यालय में सेमेस्टर परीक्षाएं चल रही हैं और वह खुद अदिति के साथ पढ़ते हैं। उनके अनुसार, अदिति छात्रों से सामान्य रूप से मिलती-जुलती हैं और पढ़ाई पर ध्यान दे रही हैं।
पुराने रिकॉर्ड क्या बताते हैं
पुरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अदिति यादव ने अपनी स्कूली शिक्षा लखनऊ के ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज से पूरी की थी। वर्ष 2020 में उन्होंने 12वीं की परीक्षा में 98 प्रतिशत अंक हासिल किए थे।
हालांकि पहले कुछ रिपोर्टों में उनके विदेश में होने की चर्चा जरूर हुई थी, लेकिन हालिया दावों और सामने आई जानकारी के अनुसार वह फिलहाल दिल्ली में अपनी पढ़ाई कर रही हैं।
कई जगह दर्ज हुई एफआईआर
समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है। कानपुर में साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर कुछ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है।
वहीं प्रतापगढ़ में भी एक फेसबुक आईडी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप है कि उस अकाउंट से लगातार भ्रामक और गलत जानकारी साझा की जा रही थी।
अब पुलिस की साइबर सेल और फॉरेंसिक विशेषज्ञ डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित पोस्ट और तस्वीरें कहां से साझा की गईं और इनके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
नेताओं की प्रतिक्रियाओं से बढ़ी बहस
मामले पर कई राजनीतिक नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। कुछ नेताओं ने इस तरह की पोस्ट की निंदा करते हुए इसे सामाजिक मर्यादा के खिलाफ बताया है। वहीं समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इसे राजनीतिक साजिश और चरित्र हनन की कोशिश बताया है।
दूसरी ओर कुछ नेताओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली गलत जानकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान न पहुंचे।
फर्जी खबरों से सावधान रहने की जरूरत
डिजिटल दौर में जानकारी बहुत तेजी से फैलती है। ऐसे में बिना जांच-पड़ताल के किसी भी वायरल पोस्ट को सच मान लेना कई बार गलतफहमी और विवाद पैदा कर सकता है।
अदिति यादव से जुड़ा यह मामला भी यही संदेश देता है कि किसी भी दावे पर विश्वास करने से पहले उसके तथ्यों की पुष्टि करना जरूरी है। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर बात सच हो, यह जरूरी नहीं होता।


