PM Modi G7 Summit 2026: इस समय पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। वैश्विक स्तर पर महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे कई मुद्दे अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बने हुए हैं। विशेष रूप से ईरान और इजरायल से जुड़े घटनाक्रमों ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ऐसे माहौल में भारत ने सहयोग और विश्वास का संदेश देकर सकारात्मक पहल की है।
मोदी-ट्रंप मुलाकात पर चर्चा
समिट के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बीच संभावित बातचीत को लेकर भी व्यापक चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि दोनों नेता पश्चिम एशिया की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक भूमिका और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कर सकते हैं।
ऊर्जा और व्यापार पर फोकस
सूत्रों के अनुसार भारत और अमेरिका अपनी ऊर्जा साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए नए अवसर तलाश रहे हैं। इसके अलावा दोनों देशों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर भी सकारात्मक प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संभावित बैठक आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
साझेदारी की असली ताकत बताई
जी7 समिट के आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आपसी विश्वास, सम्मान और समान भागीदारी बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विकास तभी प्रभावी और टिकाऊ बनता है, जब वह लोगों की जरूरतों और आकांक्षाओं से जुड़ा हो।
बराबरी के रिश्तों पर जोर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी साझेदारी की सफलता इस बात से तय होती है कि वह सभी पक्षों को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करती है या नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज की दुनिया में बराबरी और सम्मान पर आधारित संबंध ही स्थायी प्रगति का आधार बन सकते हैं।
भरोसा सबसे बड़ी पूंजी
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया को अब दाता और प्राप्तकर्ता की पारंपरिक सोच से आगे बढ़ने की आवश्यकता है। सभी देशों को समान भागीदार के रूप में मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि साझेदारी निर्भरता पर नहीं, बल्कि सम्मान और विश्वास पर आधारित होनी चाहिए।
विश्वास की कमी सबसे बड़ी चुनौती
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन देशों के बीच विश्वास की कमी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। उनके अनुसार आज के दौर में भरोसा ही सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति है, जो वैश्विक स्थिरता और विकास को नई दिशा दे सकती है।
आगामी बातचीत पर टिकी निगाहें
अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जी7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच क्या चर्चा होती है। जानकारों का मानना है कि यह संभावित बातचीत आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने तथा वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।








