Jaipur SMS Hospital: जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल में बुधवार का दिन बेहद भावुक रहा। रोजाना पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर उस समय खुद को संभाल नहीं सके, जब उनके गुरु और फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख रहे डॉ. नंदलाल डिसानिया का शव पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी पहुंचा। डॉक्टरों से लेकर वार्ड बॉय तक की आंखें नम हो गईं। कई डॉक्टरों ने कहा कि जिनसे उन्होंने काम सीखा, उनके ही शव का पोस्टमार्टम करना उनके लिए बेहद कठिन था।
अपने गुरु का पोस्टमार्टम करने से हिचके डॉक्टर
डॉ. डी.के. शर्मा ने बताया कि जब डॉ. नंदलाल डिसानिया का शव मोर्चरी में लाया गया, तो कोई भी डॉक्टर पोस्टमार्टम करने के लिए तैयार नहीं था। सभी का कहना था कि वे अपने गुरु के शरीर पर चाकू नहीं चला सकते। कुछ देर के लिए यह भी विचार किया गया कि शव को किसी दूसरे सरकारी अस्पताल भेज दिया जाए, लेकिन बाद में साथियों से चर्चा के बाद मेडिकल बोर्ड बनाकर प्रक्रिया पूरी की गई।
पोस्टमार्टम के दौरान कांप गए हाथ
मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉ. दीपाली ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन अपने ही विभागाध्यक्ष का पोस्टमार्टम करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान उनके हाथ कांप रहे थे, क्योंकि सामने वही व्यक्ति थे, जिन्होंने उन्हें फॉरेंसिक मेडिसिन की बारीकियां सिखाई थीं। डॉ. सुमंत दत्ता ने भी भावुक होते हुए बताया कि वे वर्ष 1996 से डॉ. डिसानिया के साथ काम कर रहे थे। दोनों ने वर्षों तक साथ मिलकर हजारों पोस्टमार्टम किए। उन्होंने कहा कि कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन अपने साथी और गुरु के पोस्टमार्टम का गवाह बनना पड़ेगा।
चिकित्सा क्षेत्र में दिया बड़ा योगदान
डॉ. सुमंत दत्ता के अनुसार, डॉ. नंदलाल डिसानिया अपने शांत स्वभाव और अच्छे व्यवहार के लिए जाने जाते थे। वे हर सुबह अपने साथियों को शुभकामना संदेश भेजते थे। उनके प्रयासों से एसएमएस अस्पताल में प्रदेश की पहली पॉइजन डिटेक्शन एंड ड्रग लेवल लैब की स्थापना भी हुई, जिससे फॉरेंसिक जांच को नई दिशा मिली।
पुलिस जांच में सामने आई जानकारी
जानकारी के अनुसार, डॉ. नंदलाल डिसानिया ने बुधवार सुबह अपने घर पर आत्महत्या कर ली। सुबह उन्होंने अपनी बेटी को सामान्य तरीके से विदा किया था। कुछ समय बाद जब उनका बेटा अविनाश घर लौटा, तो उन्होंने पिता को फंदे से लटका पाया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला कि वे पिछले कुछ समय से अवसाद (डिप्रेशन) का इलाज करा रहे थे। उनके घर से दवाइयां भी मिली हैं। परिवार में उनकी पत्नी, चार बेटियां और एक बेटा हैं। उनके निधन से परिवार के साथ-साथ चिकित्सा जगत में भी गहरा शोक है।









