Girl Neelu Clears NEET UG: लखनऊ की रहने वाली नीलू ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने परिस्थितियां कभी बाधा नहीं बनतीं। आर्थिक तंगी, पिता का असमय निधन और सीमित संसाधनों जैसी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने NEET UG परीक्षा पास कर अपने परिवार और शहर का नाम रोशन किया है। बचपन में इलाज के अभाव में पिता को खोने का दर्द ही उनके जीवन का सबसे बड़ा संकल्प बन गया। अब उनका सपना कार्डियोलॉजिस्ट बनकर उन गरीब मरीजों का इलाज करना है, जिन्हें आर्थिक कमजोरी के कारण बेहतर चिकित्सा नहीं मिल पाती।
मां की मेहनत और बेटी का संकल्प बना सफलता की कहानी
गोमती नगर के डिगडिगा गांव की रहने वाली नीलू अपनी मां राजकुमारी और छोटी बहन के साथ रहती हैं। पिता के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई। वह अस्पताल में सहायिका के रूप में काम करने के साथ-साथ घरों में घरेलू काम करके परिवार का खर्च चलाती हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने बेटियों की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी। कई लोगों ने आर्थिक हालात का हवाला देकर बेटियों की पढ़ाई छोड़ने की सलाह दी, लेकिन मां ने शिक्षा को ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनाया। नीलू का कहना है कि जब वह आठवीं कक्षा में थीं, तब इलाज के अभाव में उनके पिता का निधन हो गया था। उसी दिन उन्होंने डॉक्टर बनने का फैसला किया ताकि भविष्य में किसी परिवार को गरीबी के कारण अपनों को न खोना पड़े।
स्कॉलरशिप के सहारे पूरी हुई तैयारी
नीलू की शुरुआती शिक्षा स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन (SHEF) के प्रेरणा गर्ल्स स्कूल से हुई। पढ़ाई में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण उन्हें कक्षा 11 में स्टडी हॉल स्कूल की छात्रवृत्ति मिली। इसके बाद उन्होंने सीबीएसई बोर्ड परीक्षा और NEET की तैयारी एक साथ की। इस वर्ष उन्होंने 12वीं की सीबीएसई परीक्षा में 94 प्रतिशत अंक प्राप्त किए और इसके बाद NEET UG भी क्वालिफाई कर लिया। आरक्षित वर्ग में उन्हें 54,524 रैंक मिली है, जिसके आधार पर उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने की उम्मीद है। अब वह मेडिकल शिक्षा पूरी कर हृदय रोग विशेषज्ञ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
देशभर के चुनिंदा छात्रों में मिली वहानी स्कॉलरशिप
नीलू की मेहनत और प्रतिभा को देखते हुए उन्हें प्रतिष्ठित वहानी स्कॉलरशिप भी प्रदान की गई है। देशभर से आए हजारों आवेदनों में केवल 50 छात्रों का चयन इस स्कॉलरशिप के लिए किया गया। इसके तहत उनकी मेडिकल शिक्षा की ट्यूशन फीस और अन्य शैक्षणिक खर्चों में आर्थिक सहायता मिलेगी। नीलू का मानना है कि शिक्षा ही गरीबी से बाहर निकलने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उनका कहना है कि जीवन की हर कठिनाई ने उन्हें और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा दी और यही विश्वास उन्हें आज इस मुकाम तक लेकर आया है।
स्कूल ने बताया बेटियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक
स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. उर्वशी साहनी ने कहा कि नीलू की सफलता इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा आर्थिक परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती। सही अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रोत्साहन मिलने पर कोई भी छात्र बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। स्कूल की प्रधानाचार्या मीनाक्षी बहादुर ने बताया कि नीलू शुरू से ही मेहनती, अनुशासित और लक्ष्य के प्रति समर्पित छात्रा रही हैं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी बोर्ड परीक्षा और NEET जैसी चुनौतीपूर्ण परीक्षा में सफलता हासिल कर यह साबित किया है कि दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है। आज नीलू की कहानी हजारों छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।









