गुरूवार, अगस्त 13, 2026
  • Login
News1India
  • राष्ट्रीय
  • देश
  • विदेश
  • राज्य ▼
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्ली
    • बिहार
    • हरियाणा
    • राजस्थान
    • छत्तीसगढ़
    • गुजरात
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
  • क्राइम
  • बिजनेस
  • टेक्नोलॉजी
  • धर्म
  • मौसम
  • ऑटो
  • खेल
🔍
Home Health

Probiotics: क्या हर इंसान के लिए एक जैसा काम करते हैं प्रोबायोटिक्स? क्या खान पान का पड़ता है ज़्यादा असर

भारतीयों की आंतों के गट माइक्रोबायोम पर हुई रिसर्च से पता चला है कि स्थानीय खानपान और जीवनशैली का बैक्टीरिया पर असर पड़ता है। इससे प्रोबायोटिक्स को लेकर नई बहस शुरू हुई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि विदेशी प्रोबायोटिक्स बेअसर हैं, बल्कि इनके फायदे व्यक्ति और स्ट्रेन के अनुसार अलग हो सकते हैं।

by Sadaf Farooqui
अगस्त 13, 2026
in Health
Share on FacebookShare on Twitter

RELATED NEWS

No Content Available

Health News: लंबे समय से माना जाता रहा है कि बाजार में उपलब्ध प्रोबायोटिक्स हर व्यक्ति के लिए समान रूप से फायदेमंद होते हैं। लेकिन भारतीयों की आंतों पर हुई एक नई रिसर्च ने इस धारणा पर सवाल खड़े किए हैं। पुणे स्थित नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस (NCCS) और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने भारत की कुछ जनजातीय आबादी के गट माइक्रोबायोम का अध्ययन किया।

रिसर्च में ऐसे बैक्टीरिया और उनके स्ट्रेन्स की पहचान हुई, जो इन भारतीय समुदायों की आंतों में पाए गए, लेकिन पश्चिमी आबादी में बहुत कम या अलग रूप में देखे जाते हैं।

खानपान से बदलता है गट माइक्रोबायोम

हमारे पाचन तंत्र में मौजूद बैक्टीरिया हमारे खानपान और जीवनशैली से गहराई से प्रभावित होते हैं। पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक आहार का असर भी आंतों में मौजूद माइक्रोब्स पर पड़ता है।

स्टडी में यह संकेत मिला कि कुछ भारतीय गट बैक्टीरिया स्थानीय भोजन में मौजूद जौ, गेहूं और डेयरी जैसे खाद्य पदार्थों से जुड़े पोषक तत्वों के उपयोग के लिए अनुकूलित हो सकते हैं। यही वजह है कि अलग-अलग आबादी के गट माइक्रोबायोम में महत्वपूर्ण अंतर देखने को मिल सकता है।

क्या विदेशी प्रोबायोटिक्स भारतीयों के लिए बेअसर हैं?

इस रिसर्च का मतलब यह नहीं है कि विदेशों में विकसित सभी प्रोबायोटिक्स भारतीयों के लिए बेअसर हैं। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक प्रोबायोटिक्स का असर व्यक्ति के गट माइक्रोबायोम, खानपान और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।

किसी व्यक्ति को प्रोबायोटिक लेने के बाद फायदा मिल सकता है, जबकि दूसरे व्यक्ति को खास लाभ न मिले या गैस और पेट फूलने जैसी परेशानी महसूस हो सकती है। इसलिए केवल विज्ञापन देखकर कोई सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है।

क्या खाना हो सकता है ज्यादा फायदेमंद?

विशेषज्ञों की सलाह है कि आंतों की सेहत के लिए फाइबर से भरपूर और विविध आहार को प्राथमिकता दी जाए। दालें, साबुत अनाज, सब्जियां, फल और पारंपरिक फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं।

हालांकि, किसी बीमारी या लगातार पाचन संबंधी समस्या में प्रोबायोटिक सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

Tags: Digestive HealthProbiotics
Share196Tweet123Share49

Sadaf Farooqui

Related Posts

No Content Available
Next Post
Sridevi Birth Anniversary: श्रीदेवी की बायोग्राफी की पहली झलक आई सामने, प्रियंका चोपड़ा ने शेयर किया कवर

Sridevi Birth Anniversary: श्रीदेवी की बायोग्राफी की पहली झलक आई सामने, प्रियंका चोपड़ा ने शेयर किया कवर

Sunidhi Chauhan Birthday: 5 साल की उम्र से शुरू हुआ संगीत का सफर, इस गाने की सफलता से बनीं बॉलीवुड की दमदार आवाज

Sunidhi Chauhan Birthday: 5 साल की उम्र से शुरू हुआ संगीत का सफर, इस गाने की सफलता से बनीं बॉलीवुड की दमदार आवाज

News1India

Copyright © 2025 New1India

Navigate Site

  • About us
  • Privacy Policy
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • राष्ट्रीय
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्ली
    • बिहार
    • हरियाणा
    • राजस्थान
    • छत्तीसगढ़
    • गुजरात
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
  • क्राइम
  • बिजनेस
  • टेक्नोलॉजी
  • धर्म
  • मौसम
  • ऑटो
  • खेल

Copyright © 2025 New1India

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist