Ram Mandir Donation Row: अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले को लेकर संतों के बीच शुरू हुई लामबंदी अब विवाद में बदल गई है। राष्ट्रीय उच्चाधिकार समिति के महासचिव और मध्य प्रदेश के संत महामंडलेश्वर नामदेव दास त्यागी उर्फ कंप्यूटर बाबा ने आरोप लगाया कि देशभर के संतों की प्रस्तावित बैठक को जिला प्रशासन ने नहीं होने दिया। हालांकि बाद में उन्होंने कारसेवकपुरम के पास एक गेस्ट हाउस में अयोध्या के कुछ संतों-महंतों के साथ बंद कमरे में बैठक की और बाहर आकर चंदा चोरी के विरोध में नारेबाजी की।
सीबीआई जांच की मांग
कंप्यूटर बाबा ने आरोप लगाया कि चढ़ावा चोरी के मामले में प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे ज्ञापन में पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत कार्रवाई की मांग रखी। इस दौरान गेस्ट हाउस और आसपास पुलिस बल की तैनाती रही। कंप्यूटर बाबा रामलला के दर्शन किए बिना ही वहां से लौट गए।
संतों को नजरबंद करने का आरोप
समिति के सदस्यों का आरोप है कि मंगलवार सुबह कई संतों और महंतों के साथ बड़ी बैठक प्रस्तावित थी। उनका दावा है कि सोमवार रात से ही गेस्ट हाउस में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी पहुंच गए और वहां मौजूद संतों को बाहर जाने से रोक दिया गया। हालांकि बाद में बंद कमरे में समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत प्रकाशानंद गिरी ने समिति के संतों और अयोध्या के कुछ साधु-संतों के साथ चर्चा की। बैठक के बाद कंप्यूटर बाबा ने फिर आरोप लगाया कि चढ़ावे से जुड़े मामले में बड़े लोगों को बचाया जा रहा है।
नया ट्रस्ट बनाने की मांग
कंप्यूटर बाबा ने मौजूदा ट्रस्ट को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर के नाम पर ट्रस्ट बनना चाहिए था, लेकिन तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बनाकर कथित तौर पर भ्रष्टाचार किया गया। उनकी मांग है कि मौजूदा ट्रस्ट को भंग कर नया ट्रस्ट बनाया जाए, जिसमें अयोध्या और देशभर के साधु-संतों को प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर विचार नहीं हुआ तो अयोध्या में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा चित्रकूट से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने की योजना की भी बात कही।
प्रशासन ने आरोप नकारे
बैठक में जानकी घाट बड़ा स्थान के महंत जन्मेजय शरण, महंत दिलीप दास और कांग्रेस नेता शरद शुक्ला समेत अन्य लोग मौजूद बताए गए। वहीं पुलिस ने संतों के आरोपों को खारिज किया है। सीओ आशुतोष तिवारी के मुताबिक, प्रस्तावित बैठक के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। पुलिस अधिकारी का दावा है कि बैठक में अपेक्षित संख्या में संत नहीं पहुंचे, जिसके बाद समिति की ओर से लगाए गए आरोप निराधार बताए जा रहे हैं।








