भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की चर्चा फिर तेज हो गई है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाने की अनुमति देने वाले विधेयक को आगे बढ़ा दिया है। इसमें भारत का नाम भी संभावित प्रभावित देशों में शामिल है।
रूस से तेल बनी वजह
इस पूरे विवाद की बड़ी वजह भारत का रूस से कच्चा तेल खरीदना है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी तेल खरीदता रहा है। अमेरिका का तर्क है कि रूस से होने वाली ऊर्जा आय उसके युद्ध प्रयासों को आर्थिक आधार देती है। इसी वजह से रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए दूसरे देशों पर भी आर्थिक कार्रवाई की बात हो रही है।
100 प्रतिशत शुल्क कैसे
प्रस्तावित कानून राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की शक्ति दे सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि विधेयक पारित होते ही भारत पर तुरंत 100 प्रतिशत शुल्क लागू हो जाएगा। अंतिम निर्णय और इसके इस्तेमाल की प्रक्रिया अलग होगी।
भारत पर क्या असर
अगर अमेरिका वास्तव में भारत के सामान पर इतना ऊंचा शुल्क लगाता है, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इससे अमेरिका को निर्यात करने वाले भारतीय कारोबारियों और कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है। खास तौर पर वे क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं जिनकी अमेरिकी बाजार पर अधिक निर्भरता है।
व्यापार पर भी असर
100 प्रतिशत टैरिफ का खतरा भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच व्यापार और शुल्क को लेकर पहले भी बातचीत होती रही है। फरवरी 2026 में अमेरिका ने भारत के लिए अपने पारस्परिक टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की थी।
अभी फैसला बाकी
फिलहाल 100 प्रतिशत टैरिफ को भारत पर लागू मानना जल्दबाजी होगी। अमेरिकी संसद में विधायी प्रक्रिया अभी चल रही है और प्रस्ताव में बदलाव भी हो सकते हैं। इसलिए आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि विधेयक किस अंतिम रूप में पारित होता है और ट्रंप इसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ करते हैं या नहीं।









