Medical Equipment: अस्पतालों में मेडिकल उपकरणों और इलाज में इस्तेमाल होने वाली चीजों की मनमानी कीमतों पर केंद्र सरकार ने शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने मेडिकल उपकरणों की कीमतों को तर्कसंगत बनाने के लिए मेडिकल सेक्टर और निजी अस्पतालों के साथ बातचीत शुरू की है।
कीमतों में भारी अंतर
मामला तब सामने आया जब महाराष्ट्र ड्रग एंड फूड एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA की जांच में निजी अस्पतालों में मेडिकल उपकरणों की कीमतों को लेकर बड़ा अंतर सामने आया। जांच में पता चला कि अस्पताल मरीजों से कुछ उपकरणों और मेडिकल सामान के लिए बाजार कीमत या एमआरपी से कई गुना ज्यादा रकम वसूल रहे हैं।
महाराष्ट्र FDA के आयुक्त ने मेडिकल उपकरणों की वास्तविक कीमत और अस्पतालों की ओर से मरीजों से ली जाने वाली रकम के बीच भारी अंतर पर सवाल उठाए थे। कुछ मामलों में एक जैसी वस्तुओं की कीमत में 10 से 20 गुना तक का अंतर सामने आने की बात कही गई है।
सरकार ने शुरू किया संवाद
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव के साथ बैठक के बाद मेडिकल सेक्टर और अस्पतालों के साथ लगातार बैठकें करने और संवाद बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
सरकार का मकसद मेडिकल उपकरणों और दूसरी जरूरी वस्तुओं की कीमतों को ज्यादा पारदर्शी और तर्कसंगत बनाना है, ताकि इलाज के दौरान मरीजों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
दवाओं पर पहले से नियंत्रण
दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार पहले से ड्रग प्राइसेस कंट्रोल ऑर्डर यानी DPCO के तहत व्यवस्था लागू करती है। नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिंस में शामिल दवाएं शेड्यूल्ड कैटेगरी में आती हैं और उनकी कीमतों पर नियंत्रण रहता है।
हालांकि, कुछ नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं की कीमतें कंपनियां अपनी नीतियों के अनुसार तय कर सकती हैं। इसी तरह सिरिंज, ग्लव्स और कई दूसरे मेडिकल उपकरणों की कीमतों पर भी प्रभावी नियंत्रण की कमी बताई जाती है।
लागत और बिल में अंतर
एम्स कल्याणी के अध्यक्ष डॉ. वाईके गुप्ता के मुताबिक, मेडिकल सामान में उत्पादन लागत, अस्पताल की लागत और मरीज से वसूली जाने वाली रकम के बीच काफी अंतर हो सकता है।
उनका कहना है कि मरीजों को गुणवत्ता से समझौता किए बिना शोषण से बचाना जरूरी है। अस्पतालों के लिए उचित मुनाफा कमाना गलत नहीं है, लेकिन जरूरत से ज्यादा मुनाफा वसूलने पर रोक होनी चाहिए।
संसदीय समिति ने भी उठाया मुद्दा
इससे पहले अगस्त में स्वास्थ्य संबंधी संसदीय समिति ने भी निजी अस्पतालों में इलाज के लिए ली जाने वाली रकम की सीमा तय करने की सिफारिश की थी।
अब केंद्र सरकार मेडिकल उपकरणों की कीमतों को लेकर अस्पतालों और मेडिकल सेक्टर के साथ बातचीत कर रही है। अगर कीमतों को नियंत्रित करने की व्यवस्था बनती है, तो इसका सीधा असर अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों के खर्च पर पड़ सकता है।



