Diana bench history at Taj Mahal : नई दिल्ली। ताजमहल को दुनिया में प्यार की सबसे खूबसूरत निशानी माना जाता है। यह मुगल सम्राट शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया था। इसका निर्माण वर्ष 1632 में शुरू हुआ और 1653 में जाकर पूरा हुआ। यानी इसे बनाने में कुल 21 साल लगे। इसका डिज़ाइन उस्ताद अहमद लाहौरी ने तैयार किया था। ये ऐतिहासिक इमारत उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में 42 एकड़ ज़मीन पर बनी है।
यूनस्को ने ताजमहल को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा भी दिया हुआ है। सालभर यहां देश-विदेश से लाखों लोग इसे देखने आते हैं। इसकी सुंदरता को कैमरे में कैद करने के लिए पर्यटक बड़ी तादाद में पहुंचते हैं। खास बात यह है कि ताजमहल के सामने एक सफेद संगमरमर की बेंच है, जो लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
क्या है इस खास बेंच की कहानी?
ताजमहल के सामने जो बेंच रखी गई है, उस पर बैठकर फोटो खिंचवाना हर किसी की ख्वाहिश होती है। अगर कोई यहां आकर फोटो नहीं खिंचवा पाता, तो उसे हमेशा इसका अफसोस रह जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस बेंच का इतिहास क्या है।
शाहजहां ने नहीं बनवाया था ये बेंच
बहुत से लोग सोचते हैं कि इस बेंच को भी शाहजहां ने ताजमहल के साथ ही बनवाया होगा, क्योंकि यह भी संगमरमर की बनी है। लेकिन असलियत यह है कि इस बेंच का निर्माण साल 1902 में ब्रिटिश काल के वायसराय लॉर्ड कर्जन ने करवाया था। उस समय वे आगरा आए थे और उन्होंने ताजमहल के गार्डन में कई बदलाव करवाए, जिनमें ऊंचे पेड़ों की कटाई भी शामिल थी।
चार बेंचों की शुरुआत
साल 1907-1908 के बीच सेंट्रल टैंक के पास चार संगमरमर की बेंचें लगाई गई थीं। इन पर बैठकर ताजमहल का नज़ारा पीछे से देखने में बेहद खूबसूरत लगता था।
कैसे पड़ा ‘डायना बेंच’ नाम?
अब आपके मन में सवाल होगा कि इस बेंच को ‘डायना बेंच’ क्यों कहा जाता है? इसका जवाब है 1992 में ब्रिटेन की राजकुमारी डायना की भारत यात्रा। जब वो ताजमहल देखने आईं, तो उन्होंने इसी बेंच पर बैठकर एक तस्वीर खिंचवाई। यह तस्वीर दुनियाभर में इतनी मशहूर हुई कि लोग इस बेंच को ‘डायना बेंच’ कहने लगे।
कई हस्तियों ने खिंचवाई तस्वीर
डायना के अलावा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटेन की रानी एलिजाबेथ ने भी इसी बेंच पर बैठकर फोटो खिंचवाई है। हालांकि, इस बेंच को असली पहचान और लोकप्रियता प्रिंसेस डायना की तस्वीर से ही मिली।