दुनिया भर में फ्रेंचाइजी क्रिकेट तेजी से फैल रहा है। हर साल नई-नई टी20 लीग शुरू हो रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का कार्यक्रम पहले से ज्यादा व्यस्त और जटिल होता जा रहा है। कई क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ी अब लीग क्रिकेट की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। इसी स्थिति को देखते हुए इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
आईसीसी ने बनाई नई समिति
आईसीसी बोर्ड ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट के लगातार बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई है। बोर्ड ने एक विशेष समिति के गठन को मंजूरी दी है। यह समिति इस बात का अध्ययन करेगी कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और विभिन्न फ्रेंचाइजी लीगों के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए, ताकि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम प्रभावित न हो।
आईसीसी के अनुसार, समिति मौजूदा ढांचे के भीतर ऐसे समाधान तलाशेगी, जिससे खिलाड़ियों, बोर्डों और लीगों के हितों के बीच संतुलन बनाया जा सके।
कई लीगों से बढ़ा दबाव
इस समय इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) साल के लगभग दो महीने अपने नाम कर लेता है। वहीं पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) भी कई बार इसी दौरान खेली जाती है। इसके अलावा एसए20, आईएलटी20, बिग बैश लीग (बीबीएल), बांग्लादेश प्रीमियर लीग (बीपीएल), श्रीलंका प्रीमियर लीग (एसएलपीएल), द हंड्रेड और कैरेबियन प्रीमियर लीग (सीपीएल) जैसी प्रतियोगितियां भी कैलेंडर में जगह लेती हैं।
अब इसी वर्ष यूरोपीय टी20 प्रीमियर लीग की शुरुआत भी होने जा रही है। इससे खिलाड़ियों के पास कमाई और करियर के नए अवसर बढ़ेंगे, खासकर उन खिलाड़ियों के लिए जो किसी एक देश के बजाय अलग-अलग लीगों में खेलना पसंद करते हैं।
खिलाड़ियों की बदलती प्राथमिकताएं
कई क्रिकेटर अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की बजाय टी20 लीगों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसका बड़ा उदाहरण वेस्टइंडीज के बल्लेबाज निकोलस पूरन हैं, जिन्होंने 30 वर्ष की उम्र से पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। दक्षिण अफ्रीका के हेनरिक क्लासेन ने भी राष्ट्रीय टीम से दूरी बनाकर लीग क्रिकेट पर अधिक ध्यान दिया है।
वेस्टइंडीज के अनुभवी स्पिनर सुनील नरेन भी लंबे समय से राष्ट्रीय टीम की तुलना में फ्रेंचाइजी क्रिकेट में अधिक सक्रिय रहे हैं। ऐसे उदाहरण आईसीसी और क्रिकेट बोर्डों के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं।
एफटीपी पर पड़ सकता है असर
फ्रेंचाइजी क्रिकेट के विस्तार का असर आईसीसी के फ्यूचर टूर प्रोग्राम (एफटीपी) पर भी पड़ सकता है। अगर खिलाड़ियों की प्राथमिकता लीग क्रिकेट बनी रहती है, तो द्विपक्षीय सीरीज आयोजित करना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि भारत इस मामले में अलग स्थिति में है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) अपने पंजीकृत प्रथम श्रेणी खिलाड़ियों को विदेशी टी20 लीगों में खेलने की अनुमति नहीं देता, जिससे राष्ट्रीय क्रिकेट को प्राथमिकता मिलती है।
पुराने प्रस्ताव फिर चर्चा में
पिछले कुछ वर्षों में आईसीसी की विभिन्न समितियों ने सुझाव दिया था कि किसी खिलाड़ी के एक सीजन में खेलने वाली लीगों की संख्या तय होनी चाहिए। साथ ही खिलाड़ियों को अपने देश के लिए खेलने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। लेकिन अब तक इन सुझावों को लागू नहीं किया जा सका है।
फिलहाल कई खिलाड़ी एक साल में पांच से छह अलग-अलग लीगों में हिस्सा लेते हैं। यही वजह है कि आईसीसी अब क्रिकेट के भविष्य को संतुलित और व्यवस्थित रखने के लिए नए विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
