England Tour Poor Performance, टी20 विश्व कप 2026 जीतने के कुछ ही महीनों बाद टीम इंडिया का प्रदर्शन लगातार सवालों के घेरे में है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारतीय टीम पहले आयरलैंड दौरे पर एक भी मैच नहीं जीत सकी और उसके बाद इंग्लैंड ने भी टी20 सीरीज में भारत का पूरी तरह दबदबा खत्म कर दिया। साउथएम्प्टन में खेले गए पांचवें और आखिरी मुकाबले में भी भारतीय टीम गेंदबाजी, बल्लेबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में कमजोर नजर आई। यह श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम इंडिया की लगातार छठी हार रही। ऐसे में क्रिकेट प्रशंसकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर टीम का प्रदर्शन अचानक इतना कमजोर क्यों हो गया।
सलामी बल्लेबाज नहीं दे पाए अच्छी शुरुआत
टीम इंडिया की सबसे बड़ी परेशानी ओपनिंग जोड़ी का लगातार फ्लॉप होना रही। टीम मैनेजमेंट ने अभिषेक शर्मा के साथ संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ियों को मौका दिया, लेकिन कोई भी जोड़ी टीम को मजबूत शुरुआत नहीं दिला सकी। पिछले छह टी20 मुकाबलों में भारतीय ओपनिंग जोड़ी सिर्फ एक बार ही 50 रन की साझेदारी कर पाई। शुरुआत में जल्दी विकेट गिरने से पूरा दबाव मिडिल ऑर्डर पर आ गया और टीम बड़े लक्ष्य तक पहुंचने में नाकाम रही।
स्पिन गेंदबाजों पर ज्यादा भरोसा पड़ा भारी
दूसरी बड़ी वजह टीम का स्पिन गेंदबाजों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करना रहा। कप्तान श्रेयस अय्यर और कोच गौतम गंभीर ने लगातार स्पिन गेंदबाजों को अहम जिम्मेदारी दी, लेकिन उन्हें उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। रवि बिश्नोई और अक्षर पटेल जैसे अनुभवी गेंदबाज भी रन रोकने में सफल नहीं रहे। बीच के ओवरों में इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने खुलकर रन बनाए, जिससे भारत पर लगातार दबाव बढ़ता गया और मैच हाथ से निकलते गए।
बार-बार बदली गई प्लेइंग इलेवन
भारतीय टीम की लगातार हार की तीसरी बड़ी वजह हर मैच में प्लेइंग इलेवन में बदलाव करना भी माना जा रहा है। पिछले छह मुकाबलों में टीम प्रबंधन ने कई बदलाव किए, जिससे खिलाड़ियों को खुद को साबित करने का पूरा मौका नहीं मिला। लगातार बदलते टीम संयोजन का असर खिलाड़ियों के आत्मविश्वास पर भी पड़ा। कई खिलाड़ी खुलकर प्रदर्शन नहीं कर सके और टीम में अपनी जगह बचाने के दबाव में नजर आए।
अब वापसी की होगी चुनौती
लगातार छह हार के बाद टीम इंडिया के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती वापसी करने की है। टीम को अपनी बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में सुधार करना होगा। साथ ही खिलाड़ियों को स्थिर मौके देकर मजबूत टीम संयोजन तैयार करना भी जरूरी होगा। अगर इन कमियों पर समय रहते काम नहीं किया गया तो आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में भी टीम को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
