Investment Scam: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को शक है कि चिट फंड कंपनी की आड़ में काले धन को सफेद किया गया। इसी वजह से एजेंसी ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। समूह से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की जाएगी। उनके बैंक खातों के लेनदेन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
निवेश का लालच देकर जुटाई रकम
जांच में सामने आया है कि वर्ष 2007 में कैनविज नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी बनाई गई थी। कंपनी ने लोगों को निवेश पर बड़ा फायदा मिलने का भरोसा दिया। निवेशकों से कहा गया कि तीन से चार साल में उनकी रकम दोगुनी हो जाएगी। साथ ही मूलधन पर हर महीने ब्याज देने का भी वादा किया गया।
इन दावों पर भरोसा करके बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जमा पूंजी निवेश कर दी। बाद में कंपनी ने रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश की नई योजनाएं शुरू कीं। कुछ लोगों को रकम दोगुनी करने का लालच दिया गया तो कुछ को कैनविज की कॉलोनियों में प्लॉट देने का वादा किया गया।
भरोसा जीतने की बनाई गई रणनीति
शुरुआती दौर में कुछ निवेशकों को उनकी जमा रकम का एक हिस्सा लाभ के रूप में लौटाया गया। इससे लोगों का भरोसा और बढ़ गया तथा अधिक निवेश आने लगा। लेकिन बाद में हालात बदल गए और निवेशकों को न तो पूरा पैसा मिला और न ही किए गए वादे पूरे हुए।
कंपनी बंद होते ही खुला मामला
पिछले वर्ष कंपनी का कामकाज बंद हो गया। इसके बाद निवेशकों को ठगी का अहसास हुआ। आरोप है कि इस दौरान समूह से जुड़े प्रमुख लोग अपनी संपत्तियां बेचकर फरार हो गए। लोगों की जीवनभर की बचत डूबने के बाद बरेली, आसपास के जिलों, बिहार और झारखंड में 50 से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए गए।
अब ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कंपनी से जुड़े कन्हैया गुलाटी और अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
भसीन इंफोटेक पर भी कसा शिकंजा
दूसरी ओर, ग्रेटर नोएडा स्थित ‘द ग्रैंड वेनिस मॉल’ के मालिक और भसीन इंफोटेक कंपनी के संचालक सतिंदर सिंह भसीन की मुश्किलें भी बढ़ती नजर आ रही हैं। ईडी ने शुक्रवार को लखनऊ स्थित अपने जोनल कार्यालय में उनसे कई घंटों तक पूछताछ की। देर रात तक चली इस पूछताछ में कई अहम जानकारियां जुटाई गईं।
निवेशकों के पैसे दूसरी कंपनियों में लगाने का आरोप
ईडी की जांच में सामने आया है कि भसीन इंफोटेक और ग्रैंड वेनिस समूह से जुड़ी संस्थाओं ने वाणिज्यिक परियोजनाओं में समय पर कब्जा देने का वादा कर निवेशकों से सैकड़ों करोड़ रुपये जुटाए थे। आरोप है कि बाद में न तो परियोजनाएं समय पर पूरी हुईं और न ही निवेशकों को उनकी रकम वापस मिली।
जांच एजेंसी का दावा है कि निवेशकों का पैसा समूह की अन्य कंपनियों और सहयोगी संस्थाओं में भेजा गया। इन संस्थाओं का संचालन सतिंदर सिंह भसीन, हरप्रीत सिंह छाबड़ा और अजय धवन जैसे लोगों के नियंत्रण में बताया जा रहा है। ईडी अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
