ज़िंदा लाश बना रहा है ग्रेटर नोएडा का पानी: हड्डियां गलेंगी, अंग सड़ेंगे—खौफनाक रिसर्च में बड़ा खुलासा!

ग्रेटर नोएडा के गांवों में जमीन से जहर निकल रहा है। एक नए शोध के अनुसार, भूजल में क्रोमियम और कैडमियम जैसी घातक धातुएं सुरक्षित सीमा से 60 गुना ज्यादा हैं, जो सीधे तौर पर कैंसर और डीएनए को नष्ट करने का कारण बन रही हैं।

Greater Noida groundwater

Greater Noida groundwater: ग्रेटर नोएडा के नीचे छिपा जलभंडार अब जीवनदायिनी नहीं, बल्कि साक्षात मृत्युपाश बन चुका है। गलगोटिया और एकेटीयू (AKTU) यूनिवर्सिटी के एक भयावह शोध ने खुलासा किया है कि यहाँ का भूजल “पीने योग्य” शब्द के हर मानक को ध्वस्त कर चुका है। यह पानी नहीं, बल्कि क्रोमियम और कैडमियम जैसी भारी धातुओं का जानलेवा कॉकटेल है, जो शरीर के भीतर पहुँचते ही आपके रक्षा तंत्र (Immune System) को पंगु बना देता है। शोध में पाया गया है कि मानसून के बाद क्रोमियम की मात्रा खतरनाक स्तर से 60 गुना अधिक हो जाती है। यह अदृश्य विष चुपचाप कोशिकाओं पर हमला कर डीएनए (DNA) को स्थायी रूप से विकृत कर रहा है, जिससे आने वाली नस्लें भी असाध्य रोगों के साये में जन्म लेंगी।

खतरनाक रिसर्च के मुख्य बिंदु

  • अध्ययन का आधार: ‘इंटरनेशनल जर्नल क्लीनिकल एपीजेनेटिक्स’ में प्रकाशित यह शोध दो साल तक दुजाना, साधुपुर और बिसनौली जैसे गांवों में चला।

  • कैंसर का सीधा संबंध: जांच किए गए 25 कैंसर रोगियों में से 64% के जीन में विशिष्ट परिवर्तन पाए गए, जो सीधे तौर पर दूषित पानी के कारण हुए हैं।

  • अंगों की विफलता: शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यह भारी धातुएं किडनी, लिवर और फेफड़ों को धीरे-धीरे पत्थर बना रही हैं।

भारी धातुओं का स्वास्थ्य पर प्रभाव

धातु

प्रभाव

स्थिति

क्रोमियम

डीएनए क्षति, फेफड़ों का कैंसर

मानक से 60 गुना अधिक

कैडमियम

किडनी फेलियर, हड्डियों का गलना

घातक स्तर पर मौजूद

एंटी-कैंसर जीन

शरीर का सुरक्षा चक्र बंद होना

शोध में पुष्टि

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और समाधान

गलगोटिया यूनिवर्सिटी के प्रो. डॉ. अभिमन्यु कुमार झा के नेतृत्व वाली टीम ने औद्योगिक कचरे के अवैध निपटान को इस तबाही का मुख्य कारण बताया है। इस Greater Noida रिपोर्ट के सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है।

Greater Noida प्राधिकरण के महाप्रबंधक एके सिंह का कहना है कि प्रभावित गांवों में गंगाजल की पाइपलाइन बिछाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक औद्योगिक प्रदूषण पर नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक यह “धीमा जहर” लोगों की रगों में घुलता रहेगा।

नोएडा-गुड़गांव हुए पुराने, दिल्ली के बगल में बसने वाला है ‘नया स्वर्ग’… 2026 तक बन जाएगा रियल एस्टेट का ‘बाजीगर’!

Exit mobile version