5 अगस्त की सुबह करीब 5 बजे आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर तमिलनाडु एक्सप्रेस पहुंची। ट्रेन के पिछले जनरल कोच में एक लाल रंग का ट्रॉली बैग पड़ा था। ग्वालियर से ट्रेन चलने के बाद एक यात्री ने बैग से तेज बदबू आने की शिकायत की थी। आगरा पहुंचने पर GRP ने बैग की जांच की तो उनके होश उड़ गए। अंदर एक महिला के शरीर के कटे हुए हिस्से थे। धड़ और हाथ-पैर तो मिले, लेकिन सिर गायब था। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि महिला कौन है और उसकी हत्या कहां हुई?
चेन्नई से मिला सुराग
पुलिस ने बैग में शव को लपेटने के लिए इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक रैपर की जांच की। उस पर चेन्नई के एक स्थानीय ब्रांड का लोगो मिला। इससे पुलिस को शक हुआ कि हत्या की कड़ी चेन्नई से जुड़ी हो सकती है। इसके बाद टीम ने चेन्नई सेंट्रल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-4 के CCTV फुटेज खंगाले। यहीं से तमिलनाडु एक्सप्रेस नई दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। फुटेज में एक महिला और पुरुष उसी तरह का लाल ट्रॉली बैग लेकर दिखाई दिए। दोनों ने बैग को ट्रेन के जनरल कोच में रखा और खुद ट्रेन में बैठने के बजाय स्टेशन से बाहर निकल गए।
पतीले में मिला सिर
CCTV फुटेज से आरोपियों की पहचान करना आसान नहीं था। इसके बावजूद पुलिस ने लगातार जांच जारी रखी। करीब 19 दिन बाद एक मुखबिर से चेन्नई के गुडुवांचेरी इलाके में संदिग्धों से जुड़ा सुराग मिला। पुलिस एक किराए के मकान तक पहुंची। घर बंद था और अंदर कोई नहीं मिला। तलाशी के दौरान किचन में रखा एक बड़ा पतीला पुलिस की नजर में आया। उसका ढक्कन हटाया गया तो अंदर महिला का सिर और शरीर के कुछ अन्य हिस्से मिले। पुलिस को आशंका हुई कि यही वह सिर है, जिसे आगरा में मिले शव से अलग किया गया था।
हयात की पहचान हुई
जिस मकान से सिर मिला, उसका मालिक मनिकउद्दीन लस्कर था। वह भगवती माझी नाम की महिला के साथ लिव-इन में रहता था। पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि दोनों कई दिनों से गायब हैं। इसी दौरान पुलिस को पता चला कि हयात उन निशा नाम की एक महिला भी इसी घर में रहती थी और अचानक लापता हो गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि 17 साल के एक लड़के ने स्थानीय थाने में अपनी मां हयात की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने परिवार से संपर्क किया और ओडिशा के जगतसिंहपुर पहुंचकर शव की पहचान की। परिवार ने पुष्टि की कि आगरा में मिला क्षत-विक्षत शव 38 वर्षीय हयात उन निशा का था।
मणिपुर में पकड़े गए आरोपी
जांच में मनिकउद्दीन और भगवती मुख्य संदिग्ध बन चुके थे, लेकिन दोनों फरार थे। सर्विलांस और खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस को पता चला कि वे चेन्नई से करीब 2 हजार किलोमीटर दूर मणिपुर के जीरीबाम इलाके में छिपे हैं। चेन्नई पुलिस की टीम वहां पहुंची और कई दिनों तक तलाश करने के बाद 28 अगस्त को दोनों को एक झोपड़ी से गिरफ्तार कर लिया। दोनों को ट्रांजिट रिमांड पर चेन्नई लाया गया।
4 लाख के लिए हत्या
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि हयात करीब दो महीने पहले गुडुवांचेरी के इस मकान में किराएदार के तौर पर रहने आई थी। उसके पास पिछली नौकरी की करीब 4 लाख रुपये की रकम बैंक में थी। इसके अलावा उसके पास सोने के कुछ गहने भी थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने इन्हीं पैसों और गहनों के लालच में हयात की हत्या की। आरोप है कि सोते समय उसका गला घोंट दिया गया। इसके बाद शव के टुकड़े किए गए। पूरी लाश लाल सूटकेस में नहीं समा सकी, इसलिए सिर और कुछ हिस्से पतीले में छिपा दिए गए और बाकी हिस्सों को सूटकेस में भरकर तमिलनाडु एक्सप्रेस में रख दिया गया।
एक गलती ने खोला राज
आरोपियों को भरोसा था कि शव चेन्नई से हजारों किलोमीटर दूर मिलने के कारण पुलिस हत्या की कड़ी उन तक नहीं पहुंचा पाएगी। लेकिन उनकी एक गलती ने पूरी साजिश बिगाड़ दी। स्टेशन पर सूटकेस लेकर जाते समय दोनों ने अपने चेहरे नहीं ढके थे और CCTV कैमरों में कैद हो गए। इसके अलावा शव को लपेटने वाले रैपर ने पुलिस को चेन्नई तक पहुंचने में मदद की। इसी सुराग के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची और 24 दिन के भीतर पूरी मर्डर मिस्ट्री का खुलासा कर दिया।
