लैंड फॉर जॉब घोटाला: लालू परिवार पर कोर्ट का कड़ा प्रहार—’रेलवे को बना लिया था निजी जागीर’, अब चलेगा मुकदमा

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 'जमीन के बदले नौकरी' मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और उनके बेटों समेत 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है, जबकि सबूतों के अभाव में 52 आरोपियों को बरी कर दिया।

Lalu Family

Land for Job Scam: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को ‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने आदेश सुनाते हुए कहा कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी “निजी जागीर” की तरह इस्तेमाल किया और सरकारी नौकरियों को जमीन हड़पने के लिए “सौदेबाजी के चिप्स” (bargaining chip) के रूप में प्रयुक्त किया। अदालत ने पाया कि लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी और तेज प्रताप यादव सहित अन्य सदस्यों ने मिलकर एक “आपराधिक उद्यम” के रूप में काम किया। कोर्ट ने कुल 41 आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और साजिश की धाराओं के तहत मुकदमा चलाने का रास्ता साफ कर दिया है।

अदालत के फैसले की मुख्य बातें

विशेष कोर्ट ने इस Land for Job Scam मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कई कड़े अवलोकन किए:

क्या है पूरा मामला?

यह Land for Job Scam घोटाला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे के विभिन्न जोनों (जैसे जबलपुर स्थित वेस्ट सेंट्रल जोन) में नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों से पटना और अन्य इलाकों में जमीनें ली गईं। ये जमीनें या तो लालू यादव के परिवार के सदस्यों के नाम पर थीं या उनकी सहयोगी कंपनियों के नाम पर “उपहार” या सस्ते दामों पर हस्तांतरित की गई थीं।

आरजेडी की प्रतिक्रिया

आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने अदालत के फैसले के बाद जांच एजेंसियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “जो लोग राजनीतिक रूप से लालू परिवार का मुकाबला नहीं कर पा रहे, वे सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। हम इस लड़ाई को कानूनी रूप से लड़ेंगे।”

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