Delhi Air Pollution: दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण को लेकर चिंता के बीच सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ की एक टिप्पणी चर्चा में है। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि दिवाली के बाद दिल्ली की हवा काफी खराब हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि वकीलों के पास वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का विकल्प है, लेकिन जज घर पर बैठकर सुनवाई नहीं कर सकते।
यह टिप्पणी बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को एक मामले की सुनवाई की तारीख तय करने के दौरान आई। वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने प्रदूषण का हवाला देते हुए मामले को दिवाली के बाद 17 नवंबर को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था। इसी दौरान अदालत में दिल्ली की खराब होती हवा को लेकर हल्की-फुल्की बातचीत हुई।
‘दिवाली के बाद दिल्ली की हवा बहुत खराब होगी’
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि दिवाली के आसपास दिल्ली में प्रदूषण काफी बढ़ जाता है। उन्होंने सुनवाई को 17 नवंबर तक टालने का अनुरोध किया। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि दिवाली से पहले वातावरण अपेक्षाकृत साफ रहेगा, जबकि त्योहार के बाद प्रदूषण की स्थिति और बिगड़ सकती है।
जस्टिस नाथ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वकीलों के पास घर से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का विकल्प है, लेकिन जज ऐसा नहीं कर सकते। उन्हें अदालत में बैठकर मामलों की सुनवाई करनी होती है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दिल्ली-NCR में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है।
वकीलों को हाइब्रिड सुनवाई का विकल्प, जजों को आना पड़ता है कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट में हुई बातचीत का मुख्य मुद्दा अदालत में व्यक्तिगत पेशी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा था। इंदिरा जयसिंह ने प्रदूषण का जिक्र करते हुए कहा कि अदालत में आने वाले जजों को भी खराब हवा का सामना करना पड़ता है।
इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि वकील घर से पेश होकर प्रदूषण से बच सकते हैं, लेकिन जजों के लिए अदालत में उपस्थित होकर सुनवाई करना जरूरी है।
हालांकि, यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान हुई बातचीत का हिस्सा थी। इसे जजों के लिए वर्क फ्रॉम होम पर किसी औपचारिक प्रतिबंध या सभी अदालतों के लिए जारी नए आदेश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पिछले साल दिवाली के बाद तेजी से बिगड़ी थी दिल्ली की हवा
पिछले साल दिवाली के आसपास दिल्ली के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 18 अक्टूबर 2025 को दिल्ली का 24 घंटे का औसत AQI 268 था। 19 अक्टूबर को यह बढ़कर 296 हो गया, जबकि दिवाली के दिन 20 अक्टूबर को AQI 345 तक पहुंच गया था।
इसके बाद 21 अक्टूबर को AQI 351 और 22 अक्टूबर को 353 दर्ज किया गया। इस दौरान दिल्ली की हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रही।
पिछले साल के ये आंकड़े दिखाते हैं कि दिवाली के आसपास प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। हालांकि, हर साल प्रदूषण की स्थिति मौसम, हवा की गति, स्थानीय उत्सर्जन और अन्य कारकों पर निर्भर करती है।
दिल्ली-NCR में GRAP का पहला चरण लागू
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP के पहले चरण को लागू किया था। उस दिन दिल्ली का औसत AQI दोपहर 2 बजे 244 और शाम 4 बजे 245 दर्ज किया गया था।
रिपोर्टों के मुताबिक, 27 अक्टूबर को शाम 4 बजे AQI 197 था, जबकि 28 अक्टूबर की सुबह 7 बजे यह बढ़कर 228 दर्ज किया गया।
GRAP के तहत वायु गुणवत्ता बिगड़ने पर प्रदूषण कम करने के लिए अलग-अलग चरणों में कदम उठाए जाते हैं। इनमें धूल नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर निगरानी और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर कार्रवाई जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं। लागू प्रतिबंधों का दायरा संबंधित चरण और आधिकारिक निर्देशों पर निर्भर करता है।
दिल्ली के प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की नजर
सुप्रीम कोर्ट दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण से जुड़े मामलों की लगातार निगरानी कर रहा है। प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों और सड़कों से उठने वाली धूल, पराली जलाना, कचरा जलाना और पटाखों से होने वाला उत्सर्जन शामिल हैं।
अदालत ने अलग-अलग मौकों पर संबंधित अधिकारियों से प्रदूषण नियंत्रण के उपायों और प्रतिबंधों के पालन को लेकर सवाल किए हैं। दिवाली के दौरान पटाखों के इस्तेमाल को लेकर भी अदालत में सुनवाई होती रही है।
इस साल पटाखों के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध और नियंत्रित अनुमति जैसे मुद्दों पर भी बहस हुई है। अदालत के सामने सार्वजनिक स्वास्थ्य, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा तथा त्योहार से जुड़ी धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती रही है।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण से राहत कब मिलेगी?
दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण अक्सर गंभीर समस्या बन जाता है। हवा की गति कम होने, तापमान में बदलाव और विभिन्न स्रोतों से निकलने वाले प्रदूषकों के कारण प्रदूषण जमीन के करीब जमा हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए केवल पटाखों पर रोक या किसी एक स्रोत पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। वाहनों, निर्माण स्थलों, औद्योगिक इकाइयों, सड़क की धूल और कचरा जलाने जैसे स्रोतों पर भी प्रभावी नियंत्रण जरूरी है।
जस्टिस विक्रम नाथ की टिप्पणी ने एक बार फिर दिल्ली की वायु गुणवत्ता और अदालतों में काम करने वाले लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों को चर्चा में ला दिया है। दिवाली के बाद प्रदूषण किस स्तर तक पहुंचता है, यह आने वाले दिनों के मौसम और प्रदूषण नियंत्रण उपायों के प्रभाव पर निर्भर करेगा।


