ARP Process : नई व्यवस्था लागू, परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर चुने जाएंगे शिक्षक, चयनित अभ्यर्थियों को मिलेगा मोबिलिटी भत्ता

एआरपी पद के लिए चयन प्रक्रिया तय कर दी गई है। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर होगा। पात्र शिक्षकों को आवेदन का अवसर मिलेगा और चयनित अभ्यर्थियों को अतिरिक्त भत्ता भी दिया जाएगा।

ARP Selection Process : शिक्षा विभाग ने एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) के चयन की प्रक्रिया स्पष्ट कर दी है। एआरपी का चयन जिला स्तर पर गठित समिति द्वारा किया जाएगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य योग्य और अनुभवी शिक्षकों को चुनकर शैक्षिक योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करना है।

चयन दो चरणों में होगा। पहले अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा देनी होगी, इसके बाद सफल उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया जाएगा। दोनों चरणों के अंकों को मिलाकर अंतिम चयन सूची तैयार की जाएगी।

लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के अंक

एआरपी चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा के लिए 70 अंक निर्धारित किए गए हैं, जबकि साक्षात्कार के लिए 30 अंक रखे गए हैं। कुल 100 अंकों के आधार पर उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया जाएगा। हालांकि साक्षात्कार में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में कम से कम 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करना जरूरी होगा। निर्धारित अंक हासिल करने वाले उम्मीदवार ही अगले चरण के लिए पात्र माने जाएंगे।

कौन कर सकता है आवेदन?

एआरपी पद के लिए वही शिक्षक आवेदन कर सकेंगे, जिन्होंने स्नातक की पढ़ाई के साथ शिक्षक प्रशिक्षण की योग्यता प्राप्त की हो। इसके अलावा अभ्यर्थी के पास परिषदीय विद्यालय में कम से कम पांच वर्ष का शिक्षण अनुभव होना भी आवश्यक है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल वही शिक्षक आवेदन कर सकेंगे, जिनकी सेवानिवृत्ति में कम से कम पांच वर्ष का समय शेष हो। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि चयनित शिक्षक पर्याप्त समय तक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।

चयन समिति करेगी निगरानी

पूरी चयन प्रक्रिया की निगरानी के लिए मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी। इस समिति में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्राचार्य, बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला समन्वयक निपुण भारत मिशन और संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे। समिति चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने का काम करेगी।

एक वर्ष का होगा कार्यकाल

चयनित एआरपी का कार्यकाल एक वर्ष के लिए निर्धारित किया गया है। हर साल जिला स्तरीय समिति उनके कार्यों का मूल्यांकन करेगी। यदि उनका प्रदर्शन संतोषजनक पाया जाता है, तो कार्यकाल को आगे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि लगातार तीन वर्ष तक एआरपी के रूप में काम करने के बाद संबंधित शिक्षक को फिर से चयन प्रक्रिया में भाग लेना होगा और नए सिरे से आवेदन करना पड़ेगा।

मिलेगा अतिरिक्त भत्ता

एआरपी के रूप में चयनित शिक्षकों का नियमित वेतन उनके मूल विद्यालय से ही मिलता रहेगा। इसके अलावा उन्हें हर महीने 4500 रुपये का मोबिलिटी भत्ता भी दिया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि एआरपी के माध्यम से निपुण भारत मिशन और अन्य शैक्षिक योजनाओं को गांव और स्कूल स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे छात्रों की सीखने की क्षमता और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने का लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा।

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