Three Language Policy Case: CBSE ने कोर्ट में पेश किए आंकड़े, इतने प्रतिशत स्कूल पहले से पढ़ा रहे दो या अधिक भारतीय भाषाएं

सुप्रीम कोर्ट में CBSE ने तीन-भाषा नीति का बचाव करते हुए कहा कि उसके 47.3% स्कूल पहले से दो या अधिक भारतीय भाषाएं पढ़ा रहे हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि विदेशी भाषाओं पर रोक नहीं है। वहीं NCERT ने बताया कि नई पाठ्यपुस्तकों की तैयारी जारी है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा।

Three Language Policy Case: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सुप्रीम कोर्ट में तीन-भाषा नीति का बचाव करते हुए कहा है कि उससे संबद्ध लगभग 47.3% स्कूल पहले से ही कक्षा 9 के छात्रों को दो या उससे अधिक भारतीय भाषाएं पढ़ा रहे हैं। बोर्ड के अनुसार, इन स्कूलों को नई व्यवस्था लागू करने के लिए अतिरिक्त शिक्षकों की आवश्यकता नहीं होगी।

CBSE ने अदालत में दाखिल हलफनामे में बताया कि उसके 28,848 संबद्ध स्कूलों में से 99.19% स्कूलों में कम से कम एक भारतीय भाषा का शिक्षक मौजूद है।

15 मई के सर्कुलर को दी गई है चुनौती

यह मामला उन याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और चेन्नई के कुछ अभिभावकों और विदेशी भाषा के शिक्षकों ने CBSE के 15 मई 2026 के सर्कुलर को चुनौती दी है। इस सर्कुलर के तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 में तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है।

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 21A का उल्लंघन करता है तथा पहले जारी दिशा-निर्देशों के विपरीत है।

CBSE ने क्या कहा?

CBSE का कहना है कि 29 जून को जारी कार्यान्वयन दिशानिर्देश और 10 जुलाई के स्पष्टीकरण सर्कुलर के बाद याचिकाकर्ताओं की अधिकांश आपत्तियों का समाधान हो चुका है। बोर्ड ने अदालत से कहा कि विदेशी भाषाओं पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। छात्र विदेशी भाषा को तीन भाषाओं में से एक या चौथी अतिरिक्त भाषा के रूप में पढ़ सकते हैं।

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि संक्रमण काल को देखते हुए स्कूलों को लचीली स्टाफिंग व्यवस्था की अनुमति दी गई है।

NCERT तैयार कर रहा नई किताबें

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने भी सुप्रीम कोर्ट में बताया कि उसने 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तकों की तैयारी शुरू कर दी है। शिक्षा मंत्रालय, CBSE और अन्य विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स भी बनाई गई है, ताकि नई नीति के लिए आवश्यक सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जा सके।

 

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