Iqra Chaudhary: लोकसभा में शुक्रवार को शिक्षा के बाजारीकरण और सामाजिक न्याय से जुड़े दो महत्वपूर्ण विषय गूंजे। उत्तर प्रदेश के कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा चौधरी ने शून्यकाल के दौरान निजी स्कूलों के प्रबंधन और अभिभावकों पर बढ़ते वित्तीय बोझ को लेकर सरकार को घेरा।
निजी स्कूलों की ‘मोनोपॉली’
सांसद इकरा चौधरी ने सीबीएसई (CBSE) और अन्य बोर्डों के निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्कूल प्रबंधन ने शिक्षा को व्यापार बना दिया है। उन्होंने सदन को बताया:
* तय विक्रेता का दबाव: स्कूल प्रबंधन किसी एक विशेष पुस्तक विक्रेता या दुकान को तय कर देते हैं, जिससे अभिभावकों को वहीं से महंगी किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
* महंगी निजी पुस्तकें: एनसीईआरटी (NCERT) के बजाय निजी प्रकाशकों की अत्यधिक महंगी पुस्तकों को पाठ्यक्रम में शामिल कर अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है।
इकरा चौधरी के सुझाव और मांगें
सांसद ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं ताकि स्कूली शिक्षा में पारदर्शिता आ सके:
1. कीमतों पर नियंत्रण: निजी प्रकाशकों की किताबों और यूनिफॉर्म की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट राष्ट्रीय दिशानिर्देश जारी हों।
2. अनिवार्यता पर रोक: किसी एक विशेष विक्रेता से ही सामान खरीदने की अनिवार्यता को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए।
3. ऑनलाइन शिकायत पोर्टल: अभिभावकों की समस्याओं और स्कूलों की मनमानी की रिपोर्ट करने के लिए एक केंद्रीय ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाए।
4. महंगी पुस्तकों पर प्रतिबंध: पाठ्यक्रम में केवल आवश्यक और किफायती पुस्तकों को ही प्राथमिकता दी जाए।
‘भारत रत्न’ के लिए फुले दंपत्ति का नाम
शिक्षा के मुद्दे के साथ-साथ इकरा चौधरी ने सामाजिक सुधारों के क्षेत्र में क्रांतिकारी योगदान देने वाले महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले को मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की पुरजोर मांग की। उन्होंने कहा कि देश में महिला शिक्षा और दलित चेतना की अलख जगाने वाले इन महान समाज सुधारकों को सर्वोच्च नागरिक सम्मान देना पूरे देश के लिए गर्व की बात होगी।

