NEET Paper Leak Case:NEET परीक्षा से जुड़े पेपर लीक मामले की सुनवाई शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई। इस दौरान अदालत ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि यदि उच्च स्तरीय समिति बनने के बाद भी इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो इसका मतलब है कि या तो सिफारिशों में कमी थी या उन्हें सही तरीके से लागू नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि ऐसी घटनाएं केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी बेहद दुखद होती हैं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं का भरोसा बनाए रखना जरूरी है और उन्हें निराश नहीं किया जाना चाहिए।
सरकार ने जताई गंभीरता
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार इस पूरे मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि युवाओं से जुड़े इस विषय पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व इसरो प्रमुख की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट और सुझाव अदालत में जमा कर दिए हैं। समिति ने परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए कई अहम सिफारिशें की हैं।
समिति ने दी कई सिफारिशें
पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन ने अदालत को बताया कि समिति ने दीर्घकालिक सुधारों के लिए 35 और तात्कालिक सुधारों के लिए 60 सुझाव दिए थे। इनमें से अधिकांश सुझावों को लागू भी किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को और मजबूत बनाने के लिए भी कई उपाय सुझाए गए हैं। साथ ही आगामी री-नीट परीक्षा में इन सिफारिशों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
परीक्षा सुरक्षा के लिए नए कदम
NTA ने अदालत को बताया कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की अनिवार्य जांच की जाएगी और फुटेज कम से कम 90 दिनों तक सुरक्षित रखी जाएगी।
इसके अलावा परीक्षा से पहले मॉक ड्रिल, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था, बिजली बैकअप की जांच, मौसम से जुड़ी आपात योजना और परीक्षा केंद्रों का पूर्व निरीक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा।
भविष्य में बदल सकता है परीक्षा का तरीका
NTA ने यह भी बताया कि परीक्षा पूरी होने के बाद संचालन समिति फिर बैठक करेगी। इसमें इस बात पर विचार किया जाएगा कि भविष्य की NEET परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के माध्यम से कराई जाएं या मौजूदा पेन और पेपर प्रणाली को जारी रखा जाए। अदालत ने केंद्र सरकार को एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को और सुरक्षित तथा पारदर्शी बनाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाएंगे।
युवाओं का भरोसा बनाए रखना जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि संस्थाओं को मजबूत बनाना समय की जरूरत है। केवल किसी व्यक्ति पर निर्भर रहने के बजाय व्यवस्था को इतना सक्षम बनाना होगा कि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि देश के लाखों छात्रों का भरोसा बना रहे और उनका भविष्य सुरक्षित रह सके।
