देशभर में NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। इस परीक्षा में 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। सुबह से ही विभिन्न परीक्षा केंद्रों के बाहर छात्रों और उनके अभिभावकों की भीड़ देखने को मिली। हर कोई समय से पहले केंद्र पहुंचकर परीक्षा की तैयारी में जुटा नजर आया।
सुरक्षा के किए गए खास इंतजाम
दिल्ली समेत कई राज्यों में परीक्षा को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। सभी परीक्षा केंद्रों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। प्रवेश द्वारों पर अभ्यर्थियों की गहन जांच की गई और हर गतिविधि पर नजर रखी गई।
समय पर बंद हुए केंद्रों के गेट
परीक्षा दोपहर 2 बजे शुरू हुई। इसके लिए दोपहर 1:30 बजे सभी केंद्रों के गेट बंद कर दिए गए थे। इसके बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। परीक्षा शाम 5:15 बजे तक चली। परीक्षा खत्म होने के बाद अब छात्रों को परिणाम का इंतजार रहेगा।
कई जगह लागू रही धारा 163
कई शहरों में परीक्षा केंद्रों के आसपास सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए धारा 163 लागू की गई। केंद्रों के करीब 200 मीटर के दायरे में लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई, ताकि परीक्षा बिना किसी परेशानी के पूरी हो सके।
बेंगलुरु में दिखा अलग नजारा
कर्नाटक के बेंगलुरु में कुछ छात्र देरी से परीक्षा केंद्र पहुंचे। समय निकल जाने के बाद अंदर जाने की कोशिश में एक छात्रा गेट फांदती दिखाई दी। हालांकि सुरक्षा कर्मियों ने नियमों के अनुसार स्थिति को संभाल लिया और परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित नहीं होने दिया।
घायल होने के बाद भी पहुंचा छात्र
एक छात्र अपने सिर पर पट्टी बांधकर परीक्षा केंद्र पहुंचा। उसके चाचा ने बताया कि रास्ते में उनका एक्सीडेंट हो गया था, जिसके कारण उन्हें प्राथमिक उपचार लेना पड़ा। इसी वजह से वे देर से पहुंचे और परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिल सका।
अजमेर और उत्तर प्रदेश में सख्त निगरानी
राजस्थान के अजमेर में 15 परीक्षा केंद्र बनाए गए, जहां छह हजार से ज्यादा अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। सुरक्षा के लिए BSF, CRPF और पुलिस बल की तैनाती की गई। वहीं उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 75 केंद्रों पर 35,594 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। यहां बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और महिला पुलिसकर्मी तैनात किए गए।
अतिरिक्त समय से छात्रों को राहत
इस बार NTA ने छात्रों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया। पेपर लीक की घटनाओं के बाद परीक्षा व्यवस्था में कई बदलाव किए गए हैं। केरल की एक छात्रा ने कहा कि अतिरिक्त समय मिलने से प्रश्नों को बेहतर तरीके से हल करने में मदद मिली।
डॉक्टर बनने का सपना
परीक्षा केंद्रों के अंदर लाखों छात्र अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए मेहनत करते नजर आए। सभी का लक्ष्य डॉक्टर बनना और चिकित्सा क्षेत्र में अपना करियर बनाना है। दूसरी ओर, केंद्रों के बाहर सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी करती रहीं ताकि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो सके।
