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Manisha Koirala ने याद किया कैंसर का सबसे मुश्किल दौर, बोलीं- अस्पताल की वो रात बेहद डरावनी थी

Manisha Koirala Health: मनीषा कोइराला साल 2012 में चौथे चरण के ओवेरियन कैंसर से जूझ चुकी हैं। न्यूयॉर्क में सर्जरी और कीमोथेरेपी के लंबे इलाज के बाद उन्होंने इस बीमारी को मात दी। हाल ही में सुशांत प्रधान के पॉडकास्ट में अभिनेत्री ने उस मुश्किल दौर को याद किया।

उन्होंने बताया कि बीमारी का पता चलने के बाद अस्पताल में बिताई गई रात बेहद लंबी और अकेली महसूस हुई। उनके मन में लगातार यह डर था कि शायद जिंदगी खत्म होने वाली है। मनीषा के मुताबिक, गंभीर बीमारी के दौरान इंसान सिर्फ शारीरिक परेशानी नहीं झेलता, बल्कि मानसिक रूप से भी खुद को बेहद अकेला महसूस कर सकता है।

बीमारी के बाद बदली जिंदगी की प्राथमिकताएं

कैंसर से ठीक होने के बाद मनीषा का जिंदगी को देखने का नजरिया काफी बदल गया। उन्होंने बताया कि दोबारा स्वस्थ होने के बाद उन्होंने उन चीजों से दूरी बना ली, जो उनके सिद्धांतों और प्राथमिकताओं से मेल नहीं खाती थीं।

अभिनेत्री ने माना कि बीमारी से पहले वह अपनी सेहत को लेकर काफी लापरवाह थीं। अब वह स्वास्थ्य, परिवार, प्रकृति और ईश्वर के प्रति आभार को ज्यादा महत्व देती हैं।

18 घंटे तक करती थीं काम

मनीषा ने अपने करियर के शुरुआती दौर को याद करते हुए बताया कि वह कई बार लगातार 18 घंटे तक काम करती थीं और एक साथ कई फिल्मों में व्यस्त रहती थीं। इस अत्यधिक काम के कारण उन्हें मानसिक थकान का सामना करना पड़ा और उन्होंने कुछ फिल्मों के चुनाव में गलत फैसले भी लिए।

हालांकि, कैंसर के दौरान दुनिया भर से प्रशंसकों की दुआओं ने उन्हें एहसास कराया कि उनके काम ने लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है। इसके बाद उन्होंने मात्रा से ज्यादा अच्छे काम की गुणवत्ता को प्राथमिकता देने का फैसला किया।

‘सौदागर’ से ‘हीरामंडी’ तक शानदार सफर

मनीषा कोइराला ने 1991 में ‘सौदागर’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने ‘1942: ए लव स्टोरी’, ‘बॉम्बे’, ‘खामोशी’, ‘गुप्त’, ‘दिल से..’ और ‘कंपनी’ जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं।

कैंसर से उबरने के बाद उन्होंने ‘डियर माया’ और ‘संजू’ जैसी फिल्मों में वापसी की। वहीं, वेब सीरीज ‘हीरामंडी: द डायमंड बाजार’ में मल्लिकाजान के किरदार के लिए भी उन्हें खूब सराहना मिली।

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