Sneha Wagh: ‘नीरजा एक नई पहचान’, ‘ज्योति’ और ‘वीरा’ जैसे टीवी शोज में नजर आ चुकीं स्नेहा वाघ इन दिनों आध्यात्मिक यात्रा को लेकर चर्चा में हैं। एक्ट्रेस अभी भी एक्टिंग में सक्रिय हैं और फिलहाल ‘महादेव एंड सन्स’ का हिस्सा हैं, लेकिन काम के साथ उनका काफी समय मथुरा और वृंदावन में गुजर रहा है।
हाल ही में शो के प्रमोशन के लिए लखनऊ पहुंचीं स्नेहा ने अपनी आध्यात्मिक यात्रा और जिंदगी में आए बदलावों के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि श्री कृष्ण की शरण में आने के बाद उनके जीवन को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल गया है।
‘जब सब पर से विश्वास उठ गया, तब भक्ति का रास्ता चुना’
स्नेहा ने बताया कि जब उनका हर किसी से विश्वास उठ गया, तब उन्होंने भक्ति का रास्ता अपनाया। उनके मुताबिक, इस राह पर चलने के बाद उन्हें ऐसा सुकून और खुशी मिली, जिसकी उन्हें लंबे समय से तलाश थी।
एक्ट्रेस ने यह भी कहा कि अब उन्हें अपनी खुशियों के लिए किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर रहने की जरूरत महसूस नहीं होती। कृष्ण भक्ति ने उन्हें भीतर से मजबूत बनाया है और वह अब खुद के साथ ज्यादा शांत और संतुष्ट महसूस करती हैं।
वृंदावन में सिर्फ 3 दिन और महसूस हुआ बड़ा बदलाव
स्नेहा ने अपने वृंदावन जाने का अनुभव साझा करते हुए बताया कि पहली बार वहां जाने पर उन्हें एक मंदिर से बुलावा आया था। शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद यह किसी तरह का धोखा हो सकता है, लेकिन वहां बिताए समय ने उनकी सोच बदल दी।
उन्होंने बताया कि महज तीन दिन वृंदावन में रहने के बाद ही उन्हें अपने भीतर बड़ा बदलाव महसूस हुआ। श्री कृष्ण से जुड़ने के बाद उन्हें ऐसा सुकून मिला, जो पहले कभी महसूस नहीं हुआ था। इसके बाद मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी भी उन्हें पहले जैसी महत्वपूर्ण नहीं लगी।
दो शादियां टूटने के बाद रिश्तों से बनाई दूरी
स्नेहा वाघ की निजी जिंदगी में रिश्तों को लेकर भी कई मुश्किलें रही हैं। उन्होंने पहली शादी महज 19 साल की उम्र में अभिनेता अविष्कार दर्वेकर से की थी। बाद में दोनों अलग हो गए। स्नेहा ने इस रिश्ते में घरेलू हिंसा का सामना करने की बात कही थी।
इसके बाद 2015 में उन्होंने इंटीरियर डिजाइनर अनुराग सोलंकी से दूसरी शादी की, लेकिन यह रिश्ता भी ज्यादा समय तक नहीं चला और 2016 में दोनों का तलाक हो गया। स्नेहा ने उस दौरान मानसिक प्रताड़ना और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे।
अब स्नेहा का कहना है कि कृष्ण भक्ति में उन्हें वह निस्वार्थ और बिना शर्त प्यार मिला, जिसकी तलाश वह लंबे समय से कर रही थीं। उनका मानना है कि आध्यात्म ने उनके भीतर के खालीपन को भरने और जीवन में शांति पाने में मदद की है।
