Ghaziabad News: कौन है जंतर-मंतर छात्र आंदोलन से चर्चा में आए जुनैद मलिक, गांव में समाजसेवा के लिए अलग पहचान

दिल्ली के जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के दौरान चर्चा में आए गाजियाबाद के जुनैद मलिक की गांव में अलग पहचान है। ग्रामीण उन्हें समाजसेवा और जरूरतमंदों की मदद के लिए जानते हैं। पुलिस हिरासत के उनके दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

Junaid Malik Jantar Mantar Student Protest

CJP PROTEST: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान गाजियाबाद के मसूरी क्षेत्र स्थित नाहल गांव निवासी जुनैद मलिक का नाम काफी चर्चा में आया। आंदोलन के दौरान हजारों प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन और दूसरी व्यवस्थाएं संभालने के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का चेहरा बन गए। हालांकि, गांव में रहने वाले लोगों के लिए जुनैद की पहचान केवल आंदोलन से नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से लोगों की मदद करने के कारण वह हर वर्ग के बीच सम्मान हासिल कर चुके हैं।

परिवार में दूसरे नंबर

जुनैद मलिक आठ भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। उनकी सबसे बड़ी बहन की शादी मेरठ में हुई है, जबकि उनके बहनोई नौकरी के सिलसिले में मेरठ से बाहर रहते हैं। जुनैद अपने पिता मुस्तफा, मां, दादी, पांच बहनों और छोटे भाई के साथ नाहल गांव में रहते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, उनका परिवार गांव के पुराने और सम्मानित परिवारों में गिना जाता है। एलएलबी की पढ़ाई पूरी कर चुके जुनैद को बचपन से ही समाजसेवा में रुचि रही है और वह पढ़ाई के साथ लोगों की मदद करने में जुटे रहते थे।

हर किसी की मदद

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में किसी का बिजली बिल संबंधी काम हो, किसी जरूरतमंद को सरकारी योजना का लाभ दिलाना हो या ग्राम पंचायत से जुड़ा कोई मामला अटका हो, जुनैद मदद के लिए आगे रहते हैं। जरूरतमंद लोगों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और उनके काम में सहयोग करने के कारण गांव में उनकी अलग पहचान बनी है। ग्रामीणों का कहना है कि यही वजह है कि अलग-अलग जाति और धर्म से जुड़े लोग भी उन्हें सम्मान और स्नेह देते हैं।

परिवार की आर्थिक स्थिति

स्थानीय लोगों के मुताबिक, जुनैद का परिवार आर्थिक रूप से सक्षम है। परिवार के पास खेती की जमीन है और नाहल गांव में उनकी एक मार्केट भी बताई जाती है, जहां बनी दुकानों से किराये के रूप में आय होती है। इसके अलावा परिवार करीब 15 भैंसों की डेयरी भी चलाता है। ग्रामीणों का दावा है कि आर्थिक रूप से मजबूत होने के बावजूद जुनैद ने निजी लाभ के बजाय समाजसेवा को प्राथमिकता दी। इसी कारण गांव के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में उनकी अलग पहचान बनी हुई है।

हिरासत का दावा

छात्र आंदोलन खत्म होने के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर गांव में नाराजगी की बात भी सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि आंदोलन से जुड़े मामले में पुलिस पूछताछ के लिए जुनैद के पिता मुस्तफा के साथ उनकी बड़ी बहन के ससुर और देवर को भी अपने साथ ले गई थी। वहीं, जुनैद के एक वीडियो संदेश के मुताबिक, आंदोलन समाप्त होने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पूछताछ पर सवाल

जुनैद ने अपने वीडियो संदेश में दावा किया कि पुलिस ने उनकी आंखों पर काली पट्टी बांधकर उन्हें एक अज्ञात स्थान पर ले गई और वहां पूरी रात रखा गया। उनके मुताबिक, अगले दिन पुलिस अधिकारियों ने उनसे लंबे समय तक पूछताछ की। जुनैद का दावा है कि पुलिस मुख्य रूप से यह जानना चाहती थी कि आंदोलन के दौरान हजारों लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था कैसे हुई और इसकी फंडिंग किसने की। उन्होंने कहा कि सभी सवालों के जवाब देने के बाद पुलिस उनके जवाबों से संतुष्ट हुई और उन्हें छोड़ दिया गया। हालांकि, इन आरोपों और हिरासत से जुड़े दावों पर दिल्ली पुलिस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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