AIIMS Study: बच्चों के कैंसर का इलाज बना परिवारों पर आर्थिक संकट, कई ने छोड़ी नौकरी तो कहीं बिकी संपत्ति गंवाई

एम्स की स्टडी के अनुसार बच्चों के कैंसर का इलाज परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डाल रहा है। कई अभिभावकों की नौकरी छूटी, बचत और संपत्ति बिक गई, जबकि इलाज के दौरान अधिकांश बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई।

AIIMS Study:नई दिल्ली। कैंसर से जूझ रहे बच्चों का इलाज केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि उनके परिवारों के लिए आर्थिक और सामाजिक संकट भी बन रहा है। दिल्ली एम्स (AIIMS) के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल की एक नई स्टडी में सामने आया है कि इलाज के दौरान बड़ी संख्या में परिवारों को नौकरी, बचत और संपत्ति तक गंवानी पड़ रही है।

हर चौथे परिवार पर रोजगार का असर

अध्ययन के मुताबिक, 26.6 फीसदी अभिभावकों की नौकरी बच्चे के इलाज के दौरान छूट गई। वहीं, 77.1 फीसदी परिवारों को अपने शहर में इलाज की सुविधा नहीं मिलने के कारण दूसरे शहरों में जाना पड़ा, जिससे उनकी आजीविका और सामाजिक जीवन प्रभावित हुआ।

इलाज के लिए बेचनी पड़ी संपत्ति

स्टडी में पाया गया कि 26.8 फीसदी परिवारों को इलाज का खर्च उठाने के लिए अपनी चल-अचल संपत्ति बेचनी पड़ी। इनमें 12 फीसदी परिवारों ने जमीन और 9.4 फीसदी ने आभूषण बेच दिए। इसके अलावा 47.4 फीसदी परिवारों की पूरी बचत इलाज में खर्च हो गई, जबकि 27 फीसदी अभिभावकों ने रिश्तेदारों से उधार लिया।

लाखों रुपये तक पहुंचा इलाज का खर्च

एम्स के डॉक्टरों द्वारा 1,048 कैंसर पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि 50.9 फीसदी बच्चों के इलाज पर औसतन करीब तीन लाख रुपये खर्च हुए। अध्ययन में शामिल 66.4 फीसदी बच्चे शहरी और 33.6 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों से थे, जबकि 55.7 फीसदी बच्चे अस्पताल से 100 किलोमीटर से अधिक दूरी पर रहते थे। यह शोध JCO Global Oncology Journal में प्रकाशित हुआ है।

विदेशों में भी बनी हुई है चुनौती

अध्ययन के अनुसार, यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका में कैंसर पीड़ित बच्चों के माता-पिता को 12 सप्ताह का बिना वेतन अवकाश मिलता है, जबकि जापान में बड़ी संख्या में माताओं को नौकरी छोड़नी पड़ती है या लंबी छुट्टी लेनी पड़ती है।

सरकारी योजनाओं से मिल रही मदद

रिपोर्ट में बताया गया कि आयुष्मान भारत योजना, राष्ट्रीय आरोग्य निधि और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष जैसी योजनाएं मरीजों को सहायता प्रदान कर रही हैं। हालांकि, अध्ययन में यह भी उल्लेख किया गया कि दिल्ली सरकार की आरोग्य कोष योजना से एम्स को फंड नहीं मिलने के कारण कई मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा असर

अध्ययन के अनुसार, 18 फीसदी बच्चों को इलाज के लिए गैर-सरकारी संस्थाओं (NGO), 4.8 फीसदी को सरकारी योजनाओं और 1.5 फीसदी को बीमा से सहायता मिली। राहत की बात यह है कि बच्चों में कैंसर के ठीक होने की दर 80 फीसदी से अधिक है। हालांकि इलाज के दौरान 85 फीसदी बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई और 3.1 फीसदी बच्चे स्वस्थ होने के बाद भी स्कूल नहीं लौट सके।

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