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कफ सिरप खरीदना अब आसान नहीं! बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी सिरप बेस्ड दवा, जानिए क्या बदले नियम

Cough Syrup Rules India: भारत में अब कफ सिरप और अन्य सिरप बेस्ड दवाओं की बिक्री को लेकर बड़े बदलाव किए गए हैं। सरकार ने ‘ड्रग्स रूल्स 1945’ में संशोधन करते हुए ऐसी दवाओं को उन उत्पादों की सूची से बाहर कर दिया है, जिन्हें पहले कुछ शर्तों के साथ बिना प्रिस्क्रिप्शन बेचा जा सकता था। नए नियमों के बाद अब अधिकांश सिरप वाली दवाएं केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी से और डॉक्टर की सलाह पर ही उपलब्ध होंगी।

क्यों लिया गया यह फैसला?

यह निर्णय दवा सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच लिया गया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में निर्मित कुछ कफ सिरप का नाम विदेशों में बच्चों की मौत से जुड़े मामलों में सामने आया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी कई बार दूषित सिरप दवाओं में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) जैसे जहरीले तत्व पाए जाने पर चेतावनी जारी की थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों ने दवा निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण और वितरण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसी वजह से सरकार ने दवाओं की निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने का फैसला किया है।

सेल्फ-मेडिकेशन पर लगेगी रोक

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से बिना डॉक्टर की सलाह के कफ सिरप लेने के बढ़ते चलन को लेकर चिंता जता रहे थे। कई लोग मामूली खांसी, एलर्जी या सर्दी-जुकाम में खुद ही दवा खरीदकर सेवन करते हैं, जिससे गलत उपचार और साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ जाता है।

नए नियमों से न केवल सेल्फ-मेडिकेशन पर अंकुश लगेगा, बल्कि मरीजों को सही चिकित्सकीय सलाह भी मिल सकेगी। इससे दवाओं के गलत इस्तेमाल और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में मदद मिलेगी।

दवा सुरक्षा पर रहेगा खास फोकस

सरकार ने दवा निर्माण करने वाली कंपनियों की निगरानी बढ़ाने और गुणवत्ता मानकों को सख्ती से लागू करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह बदलाव मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, दवा उद्योग में भरोसा बढ़ाने और भारतीय फार्मा सेक्टर की वैश्विक साख मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। अब कफ सिरप को भी अन्य दवाओं की तरह सावधानी और चिकित्सकीय निगरानी के साथ इस्तेमाल करने की जरूरत होगी।

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