FSSAI Action On Food Labels: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और विज्ञापनों में किए जा रहे कथित भ्रामक दावों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। प्राधिकरण ने कई फूड कंपनियों को नोटिस जारी कर उनके उत्पादों की ब्रांडिंग, लेबलिंग और प्रचार सामग्री पर स्पष्टीकरण मांगा है। एफएसएसएआई का कहना है कि खाद्य उत्पादों से जुड़े सभी दावे स्पष्ट, सही और नियमों के अनुरूप होने चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह का भ्रम न हो।
आम के जूस पर उठे सवाल
एफएसएसएआई ने एक आम के जूस के पैक पर लिखे “नो एडेड शुगर” दावे पर आपत्ति जताई है। नियामक के अनुसार, उत्पाद की सामग्री में बड़ी मात्रा में आम का गूदा और गन्ने का रस शामिल है। ऐसे में “नो एडेड शुगर” लिखा होना उपभोक्ताओं को उत्पाद में मौजूद मिठास और शर्करा की मात्रा को लेकर भ्रमित कर सकता है। इसी वजह से कंपनी से इस दावे पर जवाब मांगा गया है।
पनीर के नाम पर भी आपत्ति
एक पनीर उत्पाद के नाम में “नेचुरल” शब्द के इस्तेमाल को लेकर भी एफएसएसएआई ने सवाल उठाए हैं। प्राधिकरण का कहना है कि यदि कोई उत्पाद मिश्रित सामग्री से तैयार किया गया है, तो उसे “नेचुरल” बताना नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। नियामक का मानना है कि इस तरह के शब्द ग्राहकों को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति के बारे में गलत धारणा दे सकते हैं।
टोफू पर स्वास्थ्य संबंधी दावा विवाद में
एफएसएसएआई ने टोफू उत्पाद पर किए गए कुछ स्वास्थ्य संबंधी दावों पर भी आपत्ति दर्ज की है। उत्पाद के प्रचार में विटामिन से भरपूर और एंटी-कैंसर गुण जैसे दावे किए गए थे। प्राधिकरण का कहना है कि विटामिन की मात्रा स्पष्ट रूप से बताई जानी चाहिए। वहीं, किसी खाद्य उत्पाद को बीमारी की रोकथाम या उपचार से जोड़कर प्रचारित करना नियमों के खिलाफ माना जाता है।
नूडल्स और बिस्किट भी जांच के दायरे में
कुछ नूडल्स उत्पादों पर लिखे “100 फीसदी नेचुरल” और “ताजा तैयार” जैसे दावों को भी एफएसएसएआई ने जांच के दायरे में रखा है। नियामक का कहना है कि उत्पाद की सामग्री और विज्ञापन में बताए गए दावों के बीच समानता होना जरूरी है। इसके अलावा, एक लोकप्रिय वेफर बिस्किट उत्पाद पर “मिल्क सॉलिड्स से भरपूर” होने का दावा भी जांच के घेरे में आया है। एफएसएसएआई का कहना है कि उत्पाद की सामग्री सूची इस दावे की पूरी तरह पुष्टि नहीं करती।
उपभोक्ताओं को सही जानकारी देना जरूरी
एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि खाद्य उत्पादों के पैकेट और विज्ञापनों पर लिखी जानकारी वैज्ञानिक तथ्यों और निर्धारित नियमों के अनुसार होनी चाहिए। गलत या बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावे ग्राहकों के खरीदारी संबंधी फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं। इसी कारण प्राधिकरण ने संबंधित कंपनियों को आवश्यक सुधार करने और लेबलिंग व विज्ञापन नियमों का पूरी तरह पालन करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराना है।
