Health News: भारत में बच्चों की सेहत को बेहतर बनाने और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी से समय रहते निपटने के लिए केंद्र सरकार ने पहली बार बड़ा कदम उठाया है। Ministry of Health and Family Welfare ने हाल ही में बच्चों में डायबिटीज के इलाज और देखभाल को लेकर राष्ट्रीय गाइडलाइंस जारी की हैं।
इस नई गाइडलाइन का नाम “Guidance Document on Diabetes Mellitus in Children” है, जिसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन में लॉन्च किया गया। इसका उद्देश्य बच्चों में डायबिटीज की जल्दी पहचान, सही इलाज और लंबे समय तक बेहतर देखभाल सुनिश्चित करना है।
बच्चों में तेज़ी से बढ़ रही डायबिटीज
भारत को दुनिया में डायबिटीज के बड़े केंद्रों में गिना जाता है। अब यह बीमारी सिर्फ बड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, Type 1 Diabetes में शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है, जबकि Type 2 Diabetes खराब जीवनशैली, गलत खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण हो सकती है। अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह बीमारी किडनी, आंखों और दिल पर गंभीर असर डाल सकती है।
अब पूरे देश में होगी स्क्रीनिंग
नई गाइडलाइंस के तहत जन्म से लेकर 18 साल तक के सभी बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी। स्कूलों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में शुरुआती जांच होगी। अगर किसी बच्चे में डायबिटीज के लक्षण मिलते हैं, तो तुरंत ब्लड शुगर टेस्ट कराकर उसे जिला अस्पताल रेफर किया जाएगा।
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज
सरकार ने साफ किया है कि सरकारी अस्पतालों में बच्चों को डायबिटीज का इलाज मुफ्त मिलेगा। इसमें इंसुलिन, ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स, जरूरी जांच और नियमित फॉलोअप शामिल होंगे। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
“4Ts” से पहचानें बीमारी
नई गाइडलाइंस में बच्चों में डायबिटीज की शुरुआती पहचान के लिए “4Ts” बताए गए हैं:
- Toilet – बार-बार पेशाब आना
- Thirsty – ज्यादा प्यास लगना
- Tired – हर समय थकान रहना
- Thinner – अचानक वजन कम होना
अगर बच्चे में ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
परिवार को भी दी जाएगी ट्रेनिंग
सरकार ने इस योजना में माता-पिता और देखभाल करने वालों को भी शामिल किया है। उन्हें इंसुलिन देना, ब्लड शुगर मॉनिटर करना और इमरजेंसी स्थिति संभालने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बच्चों में डायबिटीज से होने वाली जटिलताओं और मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलेगी।
