NFHS-6 Report: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे में मातृ और शिशु स्वास्थ्य में सुधार, लेकिन बढ़ता मोटापा बना चिंता

NFHS-6 रिपोर्ट में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और महिलाओं के सशक्तिकरण में सुधार दर्ज किया गया है। वहीं मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के बढ़ते मामले स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

NFHS-6 Report: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 (NFHS-6) की रिपोर्ट जारी कर दी है। यह सर्वे वर्ष 2023-24 के दौरान देश के 715 जिलों में किया गया। इसमें करीब 6.79 लाख परिवारों को शामिल किया गया था।

रिपोर्ट में देश के स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। मातृ स्वास्थ्य, शिशु स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी जैसे कई क्षेत्रों में सुधार देखने को मिला है। हालांकि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामले अभी भी चिंता का विषय बने हुए हैं।

अस्पताल में प्रसव और टीकाकरण में बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार, अब पहले के मुकाबले अधिक महिलाएं अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्रों में बच्चों को जन्म दे रही हैं। संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बढ़कर 90.6 फीसदी तक पहुंच गया है। वहीं बच्चों के पूर्ण टीकाकरण का दायरा भी बढ़ा है। अब 87.1 फीसदी बच्चों को सभी जरूरी टीके मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे बच्चों की बेहतर सुरक्षा और बीमारी से बचाव के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।

बच्चों के पोषण स्तर में सुधार

सर्वे में बच्चों के पोषण से जुड़े आंकड़ों में भी सुधार देखने को मिला है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कम लंबाई यानी स्टंटिंग की समस्या घटकर 29.3 फीसदी रह गई है। गंभीर रूप से दुबले बच्चों की संख्या में भी कमी आई है। वेस्टिंग का प्रतिशत घटकर 5.2 फीसदी हो गया है। वहीं कम वजन वाले बच्चों के आंकड़ों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पता चलता है कि पोषण संबंधी योजनाओं का असर धीरे-धीरे दिखाई दे रहा है।

गर्भवती महिलाओं को मिल रही बेहतर देखभाल

रिपोर्ट बताती है कि गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार हुआ है। एंटीनटल केयर प्राप्त करने वाली महिलाओं का प्रतिशत बढ़कर 95.9 फीसदी पहुंच गया है।

पहली तिमाही में स्वास्थ्य जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या में भी वृद्धि हुई है। जन्म के दो दिन के भीतर नवजात शिशुओं की जांच कराने का प्रतिशत 85.3 फीसदी तक पहुंच गया है। इसके अलावा आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां लेने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़ी है।

परिवार नियोजन और स्वास्थ्य बीमा का बढ़ा दायरा

देश की कुल प्रजनन दर 2.0 पर स्थिर बनी हुई है। वहीं गर्भनिरोधक साधनों का उपयोग बढ़कर 69.1 फीसदी हो गया है। इससे साफ है कि परिवार नियोजन सेवाओं की पहुंच पहले से बेहतर हुई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि स्वास्थ्य बीमा और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज 41 फीसदी से बढ़कर 60.2 फीसदी हो गया है।

महिलाओं की बढ़ी डिजिटल और आर्थिक भागीदारी

महिलाओं की डिजिटल पहुंच में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इंटरनेट का उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या लगभग दोगुनी होकर 64.3 फीसदी तक पहुंच गई है। खुद के बैंक खाते का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 89 फीसदी हो गया है। वहीं स्वयं मोबाइल फोन उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या 53.9 फीसदी से बढ़कर 63.6 फीसदी हो गई है।

बढ़ता मोटापा और डायबिटीज चिंता का विषय

रिपोर्ट का एक चिंताजनक पहलू भी सामने आया है। बदलती जीवनशैली के कारण मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते खानपान और जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में ये बीमारियां देश के स्वास्थ्य तंत्र के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।

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