Black Fever: कालाजार मुक्त होने की राह पर उत्तर प्रदेश, पांच माह में नहीं मिला एक भी नया मरीज

उत्तर प्रदेश में कालाजार नियंत्रण की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। 2026 के पहले पांच महीनों में कोई नया मरीज नहीं मिला। यदि शेष संक्रमित मरीज स्वस्थ हो जाते हैं तो प्रदेश को जल्द कालाजार मुक्त घोषित किया जा सकता है।

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Black Fever: उत्तर प्रदेश में जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। जापानी इंसेफ्लाइटिस जैसी गंभीर बीमारी पर नियंत्रण के बाद अब प्रदेश कालाजार जैसी जानलेवा बीमारी से भी लगभग मुक्त होने की स्थिति में पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में राज्य के किसी भी जिले में कालाजार का नया मरीज नहीं मिला है।

हाई रिस्क जिलों में भी नहीं मिला नया मरीज

कालाजार का सबसे अधिक खतरा पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी, संत रविदास नगर (भदोही), गाजीपुर, कुशीनगर, बलिया और देवरिया जिलों में माना जाता था। ये जिले लंबे समय तक संक्रमण के हाई रिस्क जोन रहे हैं। हालांकि इस वर्ष इन सभी जिलों में बीमारी का एक भी नया मामला सामने नहीं आया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग को बड़ी राहत मिली है।

संक्रमित मरीजों के स्वस्थ होने का इंतजार

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पहले से संक्रमित आठ मरीजों का इलाज जारी है। यदि ये सभी मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं और इस दौरान कोई नया संक्रमण नहीं मिलता, तो राज्य सरकार केंद्र सरकार को कालाजार को राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम की सूची से हटाने का प्रस्ताव भेजेगी। इसके बाद उत्तर प्रदेश को कालाजार मुक्त राज्य घोषित किया जा सकता है।

क्या है कालाजार और इसके लक्षण?

कालाजार एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो मादा बालू मक्खी (फ्लेबोटाइन सैंडफ्लाई) के काटने से फैलती है। इस बीमारी में 15 दिनों या उससे अधिक समय तक लगातार बुखार रहना, बार-बार दस्त होना, वजन कम होना तथा लीवर और प्लीहा में सूजन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।

जांच और जागरूकता अभियान से मिली सफलता

सरकार लंबे समय से कालाजार नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चला रही है। घर-घर सर्वे, समय पर जांच और जागरूकता कार्यक्रमों के कारण संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने में सफलता मिली है। बीमारी की पहचान के लिए आरके-39 किट का उपयोग किया जाता है, जिससे शुरुआती चरण में ही मरीजों का पता लगाया जा सकता है।

कैसी होती है बालू मक्खी?

कालाजार फैलाने वाली मादा बालू मक्खी आकार में बेहद छोटी होती है। इसकी लंबाई लगभग 1.5 से 3.5 मिलीमीटर तक होती है। यह संक्रमित व्यक्ति के रक्त या त्वचा से संक्रमण प्राप्त करती है और फिर स्वस्थ व्यक्ति को काटकर बीमारी फैला देती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक संक्रमित मक्खी कई लोगों तक संक्रमण पहुंचा सकती है, इसलिए बचाव और स्वच्छता बेहद जरूरी है।

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