Healthy Diet Tips: गेहूं पूरी तरह छोड़ना सही या गलत? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

सोशल मीडिया पर बढ़ रहे “नो व्हीट ट्रेंड” के बीच डॉक्टरों ने गेहूं को लेकर जरूरी सलाह दी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हर किसी के लिए गेहूं नुकसानदायक नहीं होता, लेकिन रोज सिर्फ गेहूं की रोटी खाना मोटापा और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।

Healthy Diet Tips: आजकल सोशल मीडिया पर “नो व्हीट डाइट” यानी गेहूं को पूरी तरह छोड़ने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। खासकर वजन घटाने और पेट से जुड़ी समस्याओं से परेशान लोग गेहूं की रोटी खाना बंद कर रहे हैं। इसकी जगह लोग ओट्स, मिलेट्स, रागी, बाजरा और ग्लूटेन-फ्री चीजों को अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या सच में गेहूं हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक है? क्या हर किसी को गेहूं खाना छोड़ देना चाहिए?

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ शुभम वात्स्य ने हाल ही में इस ट्रेंड को लेकर अपनी राय साझा की है। उन्होंने बताया कि गेहूं को पूरी तरह डाइट से हटाना हर किसी के लिए जरूरी नहीं है। असली समस्या गेहूं में नहीं, बल्कि उसके लगातार और एक ही तरीके से सेवन में है।

क्या गेहूं सच में नुकसान करता है?

डॉ शुभम के मुताबिक, गेहूं एक कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट है, जिसमें ग्लूटेन पाया जाता है। हालांकि हर व्यक्ति को ग्लूटेन से दिक्कत नहीं होती। केवल उन लोगों को गेहूं से बचने की जरूरत होती है जिन्हें सीलिएक डिजीज या ग्लूटेन एलर्जी जैसी समस्या हो।

उन्होंने कहा कि आजकल लोग बिना सही जानकारी के सोशल मीडिया ट्रेंड्स को फॉलो करने लगते हैं और अचानक गेहूं खाना बंद कर देते हैं, जो हर किसी के लिए सही नहीं है।

रोज सिर्फ गेहूं की रोटी खाना भी सही नहीं

डॉक्टर का कहना है कि समस्या तब शुरू होती है जब लोग रोजाना सिर्फ गेहूं की रोटी पर निर्भर हो जाते हैं। लंबे समय तक केवल गेहूं खाने से शरीर में शुगर स्पाइक बढ़ सकता है। इससे मोटापा, फैटी लिवर और ब्लड शुगर से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर खाने में विविधता नहीं होगी तो शरीर को जरूरी पोषक तत्व संतुलित मात्रा में नहीं मिल पाएंगे।

दूसरे अनाजों को भी बनाएं डाइट का हिस्सा

डॉ शुभम सलाह देते हैं कि गेहूं को पूरी तरह छोड़ने के बजाय उसे दूसरे अनाजों के साथ बैलेंस करना ज्यादा बेहतर तरीका है। उदाहरण के लिए, डायबिटीज के मरीज ज्वार की रोटी खा सकते हैं। वहीं प्रोटीन बढ़ाने के लिए बाजरा और आयरन की कमी पूरी करने के लिए रागी फायदेमंद मानी जाती है।

उन्होंने बताया कि अगर गेहूं के आटे में बाजरा, ज्वार या रागी मिलाकर रोटी बनाई जाए, तो उसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम हो जाता है। इससे शरीर पर शुगर का असर भी कम पड़ता है।

संतुलित डाइट है सबसे जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी एक चीज को पूरी तरह छोड़ने के बजाय संतुलित और विविधता वाली डाइट अपनाना ज्यादा जरूरी है। सिर्फ ट्रेंड देखकर खानपान बदलना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

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