Trump Aggressive Global Stance: डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों को लेकर वैश्विक चर्चा में हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति लगातार यह कहते आ रहे हैं कि दुनिया में ताकत के दम पर ही बात मनवाई जा सकती है। इसी सोच के तहत वह अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों को बेकार बता रहे हैं। ट्रंप खुले मंचों पर कह चुके हैं कि अमेरिका को अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए किसी समझौते की जरूरत नहीं है।
ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक रुख
हाल के दिनों में ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर फिर से आक्रामक रुख अपनाया है। उनका दावा है कि रूस को काबू में रखने के लिए अमेरिका को जबरन ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि अमेरिकी सेना जल्द वहां कदम रख सकती है। इसके साथ ही उन्होंने कनाडा और वेनेजुएला को भी अमेरिकी प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा बताया, जिससे दुनिया भर में अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है।
ब्रिटेन की नीति पर तीखी प्रतिक्रिया
इसी बीच ट्रंप की नजर भारत के पड़ोस तक पहुंच गई है। उन्होंने हिंद महासागर में स्थित दीएगो गार्सिया द्वीप को लेकर ब्रिटेन की नीति पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर ब्रिटेन की उस योजना की आलोचना की, जिसमें चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपी जा रही है।
ट्रंप ने इस फैसले को “पूरी तरह कमजोरी” और “बड़ी मूर्खता” करार दिया। उनके मुताबिक, दीएगो गार्सिया ऐसा द्वीप है जहां अमेरिका का अहम सैन्य अड्डा मौजूद है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन बिना किसी ठोस वजह के यह इलाका सौंप रहा है और चीन व रूस जैसी ताकतों ने इस कमजोरी को जरूर नोटिस किया होगा।
ट्रंप ने आगे कहा कि यही राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी उन वजहों में से एक है, जिनके चलते ग्रीनलैंड को हासिल करना जरूरी हो जाता है। उन्होंने डेनमार्क और उसके यूरोपीय सहयोगियों से “सही फैसला” लेने की अपील भी की।
ट्रंप का दावा, अमेरिका आज पहले से ज्यादा ताकतवर
ट्रंप का दावा है कि उनकी अगुवाई में अमेरिका आज पहले से ज्यादा ताकतवर और सम्मानित है।
हालांकि, इस पूरे विवाद में ट्रंप ने भारत का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया। भारत ने यूके और मॉरीशस के बीच हुए समझौते का समर्थन किया है और मॉरीशस को क्षेत्र के प्रबंधन में सहयोग भी दे रहा है। दीएगो गार्सिया चागोस द्वीप समूह का सबसे बड़ा द्वीप है, जहां 1960 के दशक से अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य अड्डा है। यह अड्डा मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और पूर्वी अफ्रीका में अमेरिकी अभियानों के लिए बेहद अहम माना जाता है।
ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच क्या हुआ समझौता
मई 2025 में ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच समझौता हुआ था। इसके तहत चागोस की संप्रभुता मॉरीशस को दी गई, जबकि दीएगो गार्सिया पर 99 साल का लीज ब्रिटेन को मिला। बदले में ब्रिटेन हर साल मॉरीशस को करीब 13.6 करोड़ डॉलर देगा। यह समझौता अभी ब्रिटिश संसद में मंजूरी के दौर में है।
ब्रिटिश सरकार ने ट्रंप की आलोचना का जवाब देते हुए कहा है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया। ब्रिटेन का कहना है कि इस समझौते से अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डा सुरक्षित रहेगा और अमेरिका की पहुंच पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भारत की भूमिका
भारत की भूमिका भी यहां अहम है। भारत लंबे समय से मॉरीशस के डिकोलोनाइजेशन का समर्थन करता रहा है। भारत ने मॉरीशस को 68 करोड़ डॉलर का सहयोग पैकेज दिया है, जिसमें समुद्री संरक्षण, सैटेलाइट स्टेशन और सर्वे जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। ट्रंप के बयानों ने एक बार फिर हिंद महासागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।









