Iran-US Conflict Escalates: मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना था, जिसके जरिए वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही को प्रभावित कर सकता है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है और युद्ध से पहले दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता था। दूसरी ओर, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए (IRNA) ने पुष्टि की कि होर्मुज स्ट्रेट के पास सिरिक क्षेत्र में तड़के हवाई हमला हुआ।
अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ी सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी सेना ने बताया कि जॉर्डन स्थित एक सैन्य अड्डे पर ड्रोन और मिसाइल हमले में दो सैनिकों की मौत हुई है। यह युद्ध शुरू होने के बाद ईरान की सीधी गोलीबारी में अमेरिकी सैनिकों की मौत का ताजा मामला है। सेंट्रल कमांड के मुताबिक, अब तक इस संघर्ष में 16 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं, जबकि 430 से अधिक घायल हुए हैं। हालांकि मृत सैनिकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। अमेरिका का कहना है कि उसके जवाबी हमले सैन्य ठिकानों और रणनीतिक क्षमताओं को निशाना बनाकर किए जा रहे हैं।
इराक और खाड़ी देशों में भी बढ़ा खतरा
संघर्ष का असर अब पड़ोसी देशों में भी दिखाई देने लगा है। इराक के इरबिल के पास कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी के एक ठिकाने पर ड्रोन हमला हुआ, जिसमें संगठन के आठ सदस्य घायल हो गए। पिछले चार दिनों में इरबिल पर कई बार ड्रोन हमले हो चुके हैं। वहीं जॉर्डन ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई ईरानी मिसाइलों को रास्ते में ही मार गिराया। बहरीन और सऊदी अरब में भी हवाई हमले के सायरन बजने से लोगों में दहशत फैल गई। क्षेत्र के कई देशों ने सुरक्षा व्यवस्था और हवाई निगरानी को और मजबूत कर दिया है।
ईरान की चेतावनी और समझौते पर बढ़ा संकट
अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता ने चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे तो अमेरिका को “कभी न भूलने वाला सबक” सिखाया जाएगा। वहीं ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका ने अंतरिम समझौते का उल्लंघन किया है, इसलिए तेहरान अब उस समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को लागू नहीं करेगा। इससे युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को बड़ा झटका लगा है। क्षेत्रीय स्तर पर ईरान समर्थित संगठनों की भूमिका को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
होर्मुज स्ट्रेट और ऊर्जा सुरक्षा पर मंडराया खतरा
यह संघर्ष अब होर्मुज स्ट्रेट के नियंत्रण और सुरक्षा पर केंद्रित होता दिखाई दे रहा है। लगातार बढ़ते हमलों से तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है। कुवैत में डिसेलिनेशन प्लांट और तेल सुविधा केंद्र पर हुए हमलों के बाद आग लगने और बिजली उत्पादन प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। कुवैत को कुछ समय के लिए अपना हवाई क्षेत्र भी बंद करना पड़ा, जबकि कई उड़ानों का समय बदला गया। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा करते हुए उन्हें गंभीर अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बताया है। ऐसे हालात में पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा या संघर्ष और व्यापक रूप लेगा।
