Russia-Ukraine War: यूक्रेन से जंग अब जमीन के साथ काले सागर से भी लड़ी जा रही है। दरअसल रूस ब्लैक सी तक का एक कॉरीडोर बनाना चाहता है। जिसमें समंदर से लगते यूक्रेनी शहर पर कब्जा करना बेहद जरूरी है। यही वजह है। रूस ने अपना दबदबा कायम करने के लिए यूक्रेन के 5 बड़े शहरों पर पूरी ताकत झोंक दी है।
ऐसा नहीं है कि रूस पहली बार ‘ब्लैक सी’ में जंग लड़ रहा है, 231 साल पहले भी ‘ब्लैक सी’ पर अपना दबदबा कायम करने के लिए रूस ने ‘बैटल ऑफ पोल्टावा’ के नाम से जंग लड़ी थी। तब से ये इलाका रूस के लिए नाक की लड़़ाई बना हुआ है

रूसी सेना के नए कमांडर एलेक्जेंडर कोर्निकोव बेहद तेजी से हमला कर रहे हैं.. वो कीव से रूसी सेना की पीछे हटने वाले दाग को भी धोना चाहते हैं.. इसलिए एक नई रणनीति पर काम कर रहे हैं.. इस बार फोकस ओडेसा, खारकीव और मारियुपोल जैसे शहरों पर है. जबकि मिसाइल से कीव और लिवीव पर हमले किए जा रहे हैं
रूस ने दावा किया है कि मारियुपोल शहर पर रूसी सेना ने कब्जा कर लिया है। मारियुपोल में लड़ाई लड़ रहे यूक्रेन की सेना को रूस ने हथियार डालने के लिए कहा था… इसके बाद अगला टारगेट डोनबास है.. जहां भयकंर हमले की तैयारी कर ली गई है
NATO के सदस्य देशों पर इकोनॉमिक और पॉलिटिकल दबदबा कायम करने के लिहाज से ‘’ब्लैक सी’’ रूस के लिए बेहद खास स्ट्रैटेजिक पॉइंट है। ‘ब्लैक सी’ की सीमा रूस के अलावा 5 देशों से लगती है… जिसमें तीन देश नाटो में शामिल हैं.. यूक्रेन पर रूस के हमले से वो काफी घबराए हुए हैं
काला सागर के आसपास के इलाके को ‘विश्व की रोटी की टोकरी’ कहा जाता है। इसकी वजह यह है कि ‘ब्लैक सी’ से लगे होने की वजह से यह क्षेत्र बेहद उपजाऊ है.. साथ ही खनिज भी काफी तादाद में मिलते हैं.. रूस इस लिहाज से भी इस इलाके को कब्जाना चाहता है
8 जुलाई 1709 में ‘ब्लैक सी’ पर कब्जा करने के लिए स्वीडिश किंग चार्ल्स ने यूक्रेन पर हमला किया था। इस दौरान यूक्रेन सोवियत रूस का हिस्सा था। इसलिए रूसी शासक ‘पीटर द ग्रेट’ और ‘किंग चार्ल्स’ के बीच जमकर लड़ाई हुई। इस जंग में रूस की जीत हुई थी। तब से ‘ब्लैक सी’ को रूस अपनी मिल्कियत मानता है
हांलाकि बाद में टर्की ने भी ‘ब्लैक सी’ पर दबदबे के लिए रूस से जंग लड़ी, लेकिन 20 जुलाई 1936 को स्विट्जरलैंड के मॉन्ट्रेक्स कन्वेंशन के जरिए रूस-तुर्की के बीच लड़ाई खत्म हुई.. और फिर रूस को टर्की के बोस्फोरस स्टेट से बिजनेस करने का अधिकार मिल गया था
‘ब्लैक सी’ को दुनिया के सबसे छोटे समुद्रों में से एक माना जाता है, लेकिन जियोपॉलिटिकल वजहों से यह बेहद खास है…’ब्लैक सी’ को ‘गेटवे ऑफ एशिया और यूरोप’ कहा जाता है। इसकी बड़ी वजह यह है कि यूरोप और एशियाई देशों का ज्यादातर व्यापार इसी रास्ते से होता है.
(By: Vanshika Singh)