US-Canada Trade War: अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर गहरा गया है। दोनों देशों के बीच तीन दिनों तक चली बातचीत के बावजूद शुक्रवार रात तय समय तक कोई समझौता नहीं हो सका। इसके बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ता रोकने का ऐलान कर दिया। कार्नी ने कहा कि अगर अमेरिका नए टैरिफ लगाता है तो कनाडा भी उसका जवाब ‘डॉलर के बदले डॉलर’ के हिसाब से देगा। इस फैसले से दोनों देशों के बीच पहले से जारी ट्रेड वॉर के और तेज होने की आशंका बढ़ गई है।
वार्ता क्यों टूटी
मार्क कार्नी के मुताबिक वॉशिंगटन में लगातार तीन दिनों तक चली बातचीत में कई मुद्दों पर प्रगति हुई थी, लेकिन आखिरी समय में अमेरिकी प्रस्ताव में किए गए बदलाव कनाडा के लिए स्वीकार्य नहीं थे। उन्होंने इन बदलावों को अनुचित और आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने वाला बताया। कार्नी ने कहा कि ऐसा समझौता तैयार नहीं हो सका, जो कनाडा के हितों और लक्ष्यों को पूरा करता। इसके बाद उन्होंने कनाडाई वार्ताकारों को ओटावा वापस लौटने का निर्देश दिया। कनाडा अब अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ दूसरे देशों के साथ व्यापार बढ़ाने की रणनीति पर भी काम करेगा।
अमेरिका का नया टैरिफ
कार्नी ने दावा किया कि अमेरिका करीब 28 अरब डॉलर मूल्य के कनाडाई सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। कनाडा ने संकेत दिया है कि अमेरिकी उत्पादों पर भी उसी अनुपात में जवाबी शुल्क लगाया जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक नए टैरिफ तय कनाडाई उत्पादों पर रात 12:01 बजे से लागू होंगे। ये शुल्क पहले से मौजूद अमेरिकी टैरिफ के ऊपर होंगे। खास बात यह है कि USMCA के तहत व्यापारिक लाभ पाने वाले कुछ कनाडाई उत्पाद भी नए शुल्क के दायरे में आ सकते हैं।
880 अरब डॉलर का कारोबार
अमेरिका और कनाडा के आर्थिक रिश्तों का आकार बेहद बड़ा है। पिछले साल दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार करीब 880 अरब डॉलर रहा। कनाडा के कुल गुड्स एक्सपोर्ट का लगभग 72 फीसदी हिस्सा अमेरिका को जाता है। दोनों देशों के बीच करीब 5,525 मील लंबी सीमा है, जहां हर दिन लगभग 3.30 लाख लोग और करीब 2 अरब डॉलर का सामान सीमा पार करता है। ऐसे में नए टैरिफ का असर केवल सरकारों तक सीमित रहने के बजाय कंपनियों, सप्लाई चेन और आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
अमेरिका का पलटवार
व्यापार वार्ता टूटने को लेकर अमेरिका की तस्वीर कनाडा से अलग है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर ने कहा कि बातचीत में प्रगति के बावजूद कनाडा खुद वार्ता की मेज से हट गया। उनके मुताबिक वॉशिंगटन ने कनाडा को अमेरिका के बड़े व्यापारिक साझेदारों में बेहतर व्यापारिक व्यवहार देने का प्रस्ताव दिया था। ग्रीयर ने आरोप लगाया कि कनाडा की नई मांगों और पहले किए गए कुछ वादों से पीछे हटने के कारण बातचीत का संतुलन बिगड़ गया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जवाबी टैरिफ लगाए जाने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास आगे कार्रवाई के विकल्प मौजूद रहेंगे।
दोनों पर आर्थिक असर
टैरिफ बढ़ने से कनाडा की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब देश आर्थिक रिकवरी को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। दूसरी तरफ अमेरिका भी इससे पूरी तरह अछूता नहीं रहेगा। अमेरिकी आयातकों को ज्यादा शुल्क देना पड़ेगा, जिसका बोझ कंपनियां ग्राहकों तक पहुंचा सकती हैं। इससे कई सामान महंगे होने और महंगाई बढ़ने का खतरा रहेगा। नवंबर के मिडटर्म चुनावों से पहले बढ़ती जीवन-यापन लागत अमेरिकी सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती भी बन सकती है। यानी यह ट्रेड वॉर सिर्फ दो देशों की सरकारों का विवाद नहीं, बल्कि कारोबार और आम लोगों की जेब से जुड़ा मुद्दा बन सकता है।



