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Secret Deal अमेरिका-हूती के बीच ओमान में हुई गुप्त बैठक, सऊदी को झटका; क्या अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करने पर बनी सहमति

अमेरिका और यमन के हूती प्रतिनिधियों के बीच ओमान की राजधानी मस्कट में गोपनीय बातचीत हुई। रॉयटर्स ने पांच सूत्रों के हवाले से बताया कि यह बैठक अमेरिकी दूतावास में हुई थी। ओमान ने बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब हूती लड़ाकों ने यमन के लाल सागर तट के कई रणनीतिक इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है।

जहाजों को लेकर क्या बात हुई

रिपोर्ट के अनुसार हूती प्रतिनिधियों ने अमेरिकी अधिकारियों को भरोसा दिलाया कि वे अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। उन्होंने इजराइली और अन्य वाणिज्यिक जहाजों को भी निशाना न बनाने की बात कही। इसके बदले हूती लड़ाकों का ध्यान सऊदी अरब से जुड़े जहाजों और ठिकानों पर केंद्रित रहने की बात सामने आई है।

यह समझ कथित तौर पर 2025 में हुए अमेरिका-हूती संघर्षविराम से जुड़ी है। अमेरिका ने 2025 में हूतियों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था, लेकिन इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच संपर्क बना रहा।

सऊदी की मदद से अमेरिका पीछे

इस घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू सऊदी अरब को लेकर अमेरिकी रुख है। रिपोर्टों के मुताबिक सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हूतियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य मदद मांगी थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सीधे अमेरिकी हमलों को मंजूरी नहीं दी। अमेरिका ने खुफिया और लक्ष्य संबंधी सहायता देने की बात जरूर कही है।

अब सामने आई बातचीत के बाद अमेरिका ने हूतियों के खिलाफ सऊदी के साथ सीधे सैन्य अभियान में शामिल होने से दूरी बनाए रखी है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वॉशिंगटन फिलहाल लाल सागर में समुद्री सुरक्षा और अपने राष्ट्रीय हितों पर ध्यान दे रहा है।

लाल सागर पर बढ़ा तनाव

हूतियों की हालिया सैन्य बढ़त ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह रास्ता अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम है। सऊदी अरब को भी अपने तेल निर्यात और सुरक्षा को लेकर दबाव का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार सऊदी अब फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र समेत दूसरे देशों से सैन्य मदद मांग रहा है।

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