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Iran Tension:क्या ट्रंप सीधे युद्ध छोड़ कूटनीतिक को दें रहे प्राथमिकता, ईरान तनाव के बीच अमेरिका की मिसाइल भंडार को लेकर बढ़ी चिंता

ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी इंटरसेप्टर मिसाइलों के घटते भंडार ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसी वजह से ट्रंप प्रशासन फिलहाल सीधे युद्ध के बजाय कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता दे रहा है।

by Kirtika Tyagi
जुलाई 26, 2026
in विदेश

Iran Conflict: ईरान के साथ लगातार बढ़ रहे सैन्य तनाव के बीच अमेरिका की एयर डिफेंस क्षमता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान की ओर से लगातार किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने के लिए अमेरिका को बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इससे अमेरिकी सैन्य भंडार पर दबाव बढ़ गया है और भविष्य में लंबे संघर्ष की स्थिति को लेकर चिंता पैदा हुई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि व्हाइट हाउस में हुई कई उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों के घटते स्टॉक पर चर्चा हुई।

हमलों ने बढ़ाई चिंता

अमेरिका की चिंता उस समय और बढ़ गई जब जॉर्डन में एक ईरानी मिसाइल अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने में सफल रही और इस हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई। बताया जा रहा है कि लगातार करीब दो सप्ताह तक चले भारी सैन्य अभियान और उसके जवाब में ईरान की ओर से किए गए मिसाइल हमलों ने अमेरिकी रक्षा संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है। ऐसे में अमेरिकी अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो एयर डिफेंस सिस्टम को लगातार प्रभावी बनाए रखने के लिए पर्याप्त इंटरसेप्टर मिसाइलें उपलब्ध रहेंगी या नहीं।

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ट्रंप ने क्यों बदला रुख

रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आशंका है कि अगर अमेरिका ईरान के साथ पूर्ण युद्ध में उतरता है तो इंटरसेप्टर मिसाइलों का मौजूदा भंडार तेजी से कम हो सकता है। इसका सीधा असर खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा पर पड़ सकता है। इसी वजह से ट्रंप प्रशासन फिलहाल तनाव को और बढ़ाने के बजाय बातचीत और कूटनीतिक विकल्पों पर जोर देता नजर आ रहा है। हालांकि, अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है।

जनरल ने दी बड़ी चेतावनी

सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी जनरल डैन केन ने व्हाइट हाउस को संभावित युद्ध के जोखिमों की जानकारी दी है। उनके मुताबिक, ईरान के साथ व्यापक सैन्य संघर्ष संभव है, लेकिन इससे मध्य पूर्व में अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के पास मौजूद एयर डिफेंस मिसाइलों का भंडार काफी तेजी से घट सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान के पास अभी बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन मौजूद हैं। ऐसे में लंबा युद्ध अमेरिका के लिए सैन्य और रणनीतिक दोनों स्तरों पर महंगा साबित हो सकता है।

बातचीत पर अभी भी जोर

व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीवन चेउंग के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य या अमेरिका के सहयोगी देशों के खिलाफ आक्रामक गतिविधियां जारी रखता है तो अमेरिका सभी विकल्प खुले रखेगा। ट्रंप ने भी हालिया बयानों में कहा है कि उनकी पहली प्राथमिकता बातचीत के जरिए समाधान निकालना है। लेकिन अगर कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते हैं तो सैन्य कार्रवाई समेत अन्य विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

लंबा युद्ध बन सकता है चुनौती

फिलहाल ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य अभियान को लेकर अमेरिका की ओर से कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई से ईरान बातचीत की मेज पर आने के बजाय और अधिक आक्रामक हो सकता है। उनका यह भी आकलन है कि किसी बाहरी खतरे की स्थिति में ईरान का नेतृत्व अपने आंतरिक मतभेदों को पीछे छोड़कर सैन्य जवाब पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सकता है। ऐसे में अमेरिका के सामने सैन्य दबाव बनाए रखने और लंबे संघर्ष से बचने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।

Tags: Iran ConflictUS Air Defense

Kirtika Tyagi

Kirtika Tyagi is a journalist. she is working on sub-editor post and she is expert in International, National, Health, Crime, Lifestyle, Astro beat. 

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