Middle East Tension Rises: मिडिल ईस्ट में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जिस संघर्षविराम की चर्चा हो रही थी, वह ज्यादा समय तक टिकता नहीं दिखा। हाल के घटनाक्रम में दोनों पक्षों के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है।
अमेरिकी सेना ने किया जवाबी कदम
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, ईरान की ओर से हुई कई आक्रामक गतिविधियों के जवाब में अमेरिका ने रक्षात्मक कार्रवाई की है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उनकी सेना ने आत्मरक्षा के तहत कई सैन्य कदम उठाए। सेंटकॉम ने यह भी दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में एक अमेरिकी ड्रोन को निशाना बनाए जाने के बाद जवाबी कार्रवाई की गई।
ईरान ने भी दिखाया कड़ा रुख
दूसरी ओर, ईरान ने भी अपने विरोधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान की ओर से मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने यह संकेत दिया है कि हालात अभी सामान्य होने से दूर हैं।
कुवैत पर हमले से बढ़ी चिंता
सोमवार सुबह कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई। इस हमले की जिम्मेदारी ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने ली। इस घटना के बाद खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
सऊदी अरब ने जताया विरोध
कुवैत पर हुए हमले के बाद सऊदी अरब ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना कदम बताया। मंत्रालय का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा पैदा करती हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट पर पड़ सकता है। खाड़ी देशों की सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस क्षेत्र के हालात पर टिकी हुई हैं और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की जा रही है।