New US Tariff Proposal On India:अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने भारत समेत करीब 60 व्यापारिक साझेदार देशों पर नए टैरिफ यानी आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिका का कहना है कि इन देशों ने जबरन मजदूरी से तैयार किए गए सामानों के आयात पर रोक को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया है। USTR ने 3 जून को 98 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की। इसमें भारत, चीन, जापान, पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और स्विट्जरलैंड सहित कई देशों पर 10 प्रतिशत से 12.5 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की सिफारिश की गई है। वहीं कनाडा, मैक्सिको, ताइवान और यूनाइटेड किंगडम पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का सुझाव दिया गया है।
रिपोर्ट में भारत को लेकर क्या कहा गया?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत जबरन मजदूरी से तैयार सामानों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने और उसे लागू करने में पूरी तरह सफल नहीं रहा है। USTR का कहना है कि ऐसी स्थिति अमेरिकी व्यापार पर असर डालती है और अमेरिकी कंपनियों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा का माहौल पैदा करती है।
अमेरिकी एजेंसी ने यह जांच ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत शुरू की थी। इस कानून के अनुसार अमेरिका उन देशों की व्यापारिक नीतियों की जांच कर सकता है जिन्हें वह अपने व्यापार के लिए अनुचित या भेदभावपूर्ण मानता है।
टैरिफ लागू हुआ तो क्या असर होगा?
अगर प्रस्तावित टैरिफ को मंजूरी मिल जाती है, तो अमेरिका में आने वाले अधिकांश आयातित उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि लगभग 70 उत्पादों को इससे बाहर रखने का प्रस्ताव भी दिया गया है। इनमें विमान, बीफ, कॉफी और कुछ अन्य विशेष उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा कपड़ा और परिधान उद्योग के लिए सीमित राहत देने के उद्देश्य से कोटा व्यवस्था का सुझाव भी रखा गया है, ताकि तय सीमा तक आयात करने वालों को कुछ छूट मिल सके।
राजनीतिक बहस भी हुई तेज
रिपोर्ट सामने आने के बाद भारत में राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है। विपक्ष के कुछ नेताओं ने इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार की कूटनीतिक और व्यापारिक विफलता के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है। इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। USTR ने आम लोगों, उद्योग जगत और अन्य संबंधित पक्षों से 6 जुलाई तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।
भारत-अमेरिका रिश्तों में क्यों बढ़ा तनाव?
पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के संबंध कई मुद्दों पर चर्चा का विषय रहे हैं। अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। उस समय रूस से तेल खरीदने के मुद्दे को लेकर भी भारत पर दबाव बनाया गया था।
भारत लगातार यह कहता रहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के अनुसार फैसले लेता है और किसी भी देश के दबाव में अपनी नीति नहीं बदलता। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कई बार स्पष्ट किया है कि भारत की प्राथमिकता “इंडिया फर्स्ट” है और देश अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार समझौते को लेकर जारी बातचीत के बीच यह नया प्रस्ताव अमेरिका की तरफ से दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
ट्रंप प्रशासन और टैरिफ की राजनीति
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से टैरिफ को व्यापारिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं। हालांकि फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनके कई टैरिफ फैसलों को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया था। इसके बाद माना जा रहा है कि ट्रंप समर्थक नीतियों से जुड़े समूह नए आधार तलाश रहे हैं, जिनके जरिए दूसरे देशों पर दबाव बनाया जा सके। जबरन मजदूरी का मुद्दा भी उसी दिशा में एक नया प्रयास माना जा रहा है।
भारत का जवाब क्या है?
भारत सरकार ने साफ कहा है कि प्रस्तावित टैरिफ अभी अंतिम नहीं हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार इच्छुक पक्ष 22 जून 2026 तक सार्वजनिक सुनवाई में भाग लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं। लिखित सुझाव 6 जुलाई 2026 तक जमा किए जा सकते हैं और 7 जुलाई को सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाएगी। सरकार का कहना है कि सभी टिप्पणियों और गवाहियों पर विचार करने के बाद ही USTR अंतिम फैसला करेगा। भारत ने सेक्शन 301 प्रक्रिया के तहत अमेरिका के साथ औपचारिक बातचीत भी शुरू कर दी है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल भारत और अमेरिका के बीच व्यापक व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है। दोनों देशों ने फरवरी 2026 में इस दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले हफ्तों में बातचीत का दौर और तेज होगा। टैरिफ प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है या नहीं, यह तो बाद में तय होगा, लेकिन इतना जरूर है कि इस मुद्दे ने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।






