Emotional Story: गुल्लक के पैसे छिनने का दर्द लेकर पहुंची मासूम फरियादी, हुआ भावुक माहौल, जिलाधिकारी ने लौटाई मुस्कान

कानपुर में 11 साल की बच्ची अपनी मां के साथ जिलाधिकारी से मिलने पहुंची। घरेलू विवाद में गुल्लक के पैसे छिनने की कहानी सुनकर प्रशासन भावुक हो गया और बच्ची को नई गुल्लक व स्कूल बैग दिए गए।

Kanpur Collectorate: उत्तर प्रदेश के कानपुर कलेक्ट्रेट में बुधवार का दिन आम दिनों से अलग रहा। यहां रोज की तरह शिकायतें और विवादों की सुनवाई हो रही थी, लेकिन एक छोटी बच्ची की कहानी ने पूरे माहौल को भावुक बना दिया।
11 साल की इस्वा खां अपनी मां शन्नो और छोटी बहन मरियम फातिमा के साथ जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह से मिलने पहुंची थी। बच्ची की मासूमियत और उसकी परेशानी सुनकर वहां मौजूद अधिकारी और लोग कुछ देर के लिए चुप हो गए।

गुल्लक में जोड़ रही थी सपने

जाजमऊ की रहने वाली शन्नो ने जिलाधिकारी को बताया कि उनके परिवार में लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस झगड़े का सबसे ज्यादा असर उनकी बेटी इस्वा पर पड़ा।
इस्वा काफी समय से अपनी मिट्टी की गुल्लक में पैसे जमा कर रही थी। रिश्तेदारों से मिले शगुन, पॉकेट मनी और छोटे-छोटे बचाए हुए सिक्के वह गुल्लक में डालती थी। बच्ची का सपना था कि गुल्लक भरने के बाद वह अपने लिए नया स्कूल बैग और किताबें खरीदेगी।

घरेलू विवाद में टूट गए सपने

महिला ने आरोप लगाया कि घरेलू झगड़े के दौरान विपक्षी पक्ष ने घर का सामान लेने के साथ बच्ची की गुल्लक भी तोड़ दी। उसमें रखे सारे पैसे निकाल लिए गए। जब जिलाधिकारी ने इस्वा से बात की, तो उसकी आंखों में अपनी मेहनत और सपनों के टूटने का दुख साफ दिखाई दे रहा था। बच्ची ने बताया कि वह बहुत दिनों से पैसे जोड़ रही थी।

जिलाधिकारी ने तुरंत दिए निर्देश

इस्वा की बातें सुनकर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह कुछ पल के लिए शांत हो गए। इसके बाद उन्होंने तुरंत जाजमऊ थाना प्रभारी को मामले की निष्पक्ष जांच करने और जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाना बेहद गलत है और मामले में सही कार्रवाई होनी चाहिए।

बच्चियों को दिए नए बैग और गुल्लक

जिलाधिकारी ने सिर्फ कार्रवाई के आदेश ही नहीं दिए, बल्कि बच्चियों के चेहरे पर मुस्कान भी लौटाई। उन्होंने इस्वा और उसकी बहन मरियम को नए स्कूल बैग और गुड़िया वाली नई गुल्लक उपहार में दी।
इसके साथ ही उन्होंने बच्चियों का हौसला बढ़ाने के लिए नई गुल्लक में 1000 रुपये भी डलवाए। नया बैग और गुल्लक मिलते ही इस्वा के चेहरे की उदासी खुशी में बदल गई।

लोगों ने की जिलाधिकारी की तारीफ

कलेक्ट्रेट में मौजूद लोगों ने इस पूरे दृश्य को काफी भावुक बताया। कई लोगों ने जिलाधिकारी की संवेदनशीलता की सराहना की। लोगों का कहना था कि प्रशासन का ऐसा मानवीय चेहरा समाज में भरोसा बढ़ाता है।

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